यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने को हरियाणा ने बनाया एक्शन प्लान

 

चंडीगढ़, 11 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने यमुना और उससे जुड़े जल स्रोतों के प्रदूषण को रोकने के लिए सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, ठोस कचरे और जल निकायों के पुनरुद्धार का काम तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई यमुना कार्य योजना की समीक्षा बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और उनकी समयसीमा की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और यमुनानगर सहित विभिन्न शहरी क्षेत्रों में चल रहे प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बताया कि गुरुग्राम में चार प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) विभिन्न चरणों में हैं। इनमें धनवापुर में 100 एमएलडी, बहरामपुर में 100 एमएलडी, नौरंगपुर में 40 एमएलडी और सेक्टर-107 में 100 एमएलडी क्षमता के संयंत्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं की वित्तीय और तकनीकी निविदाएं अगस्त और सितंबर में खोली जानी प्रस्तावित हैं।

फरीदाबाद में 20 एमएलडी क्षमता वाले मिर्जापुर एसटीपी का काम 30 अगस्त तक शुरू करने का लक्ष्य है। वहीं, 20 एमएलडी क्षमता वाली सूरजकुंड परियोजना की तकनीकी निविदाएं 24 अगस्त तक खोली जानी प्रस्तावित हैं। सोनीपत के कुंडली में 7.5 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू करने का लक्ष्य है। पानीपत के समालखा में प्रस्तावित 4 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी की वित्तीय निविदाएं 25 अगस्त तक खोली जानी प्रस्तावित हैं।

फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में प्रस्तावित 50 एमएलडी क्षमता वाले साझा औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र के लिए निविदाएं जारी की जा चुकी हैं। गुरुग्राम के सेक्टर-34 में 20 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र की तकनीकी निविदाएं 3 अगस्त को खोली गईं। इसके अलावा बादशाहपुर में 15 एमएलडी और सेक्टर-37 में 9 एमएलडी क्षमता वाले साझा उपचार संयंत्र सहित अन्य परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

यमुना किनारे बसे गांवों में सीवेज प्रबंधन पर भी जोर दिया गया है। सोनीपत, करनाल और पानीपत के गांवों में थ्री-पोंड सिस्टम तथा छोटे एसटीपी के माध्यम से सीवेज का उपचार किया जाएगा। यमुना से जुड़े स्थानीय जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत के 13 जल स्रोत चिन्हित किए गए हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 19.12 हेक्टेयर है। इन जल स्रोतों में प्रदूषण का मुख्य कारण घरेलू सीवेज पाया गया है। इनके पुनरुद्धार का काम 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा