यमुनानगर:पहाड़ाें में बर्फबारी से हथनीकुंड बैराज का जलस्तर घटा,बिजली उत्पादन पर असर
यमुनानगर, 19 जनवरी (हि.स.)। उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों की जल एवं ऊर्जा व्यवस्था पर व्यापक रूप से दिखाई देने लगा है। यमुना नदी के हथनीकुंड बैराज पर पानी की आवक में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। इसका सीधा प्रभाव पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहर प्रणालियों के साथ-साथ हाइडल बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है, जिससे क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति व्यवस्था दबाव में आ गई है।
पहाड़ो में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण पिछले कई दिनों से हथनीकुंड बैराज पर जल प्रवाह में अस्थिरता देखने को मिली है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सोमवार सुबह 6 बजे 1943, सुबह 10 बजे 3309, दोपहर 2 बजे 2112 क्यूसेक सोमवार को ही शाम 6 बजे 1764 क्यूसेक रहा तथा अधिकतम 3595 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। उपलब्ध पानी में से यमुना नदी, पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर में सीमित मात्रा में ही जल छोड़ा जा सका।
जल प्रवाह में आई इस कमी का सबसे गहरा असर पश्चिमी यमुना नहर पर स्थापित हाइडल बिजली परियोजनाओं पर पड़ा है। यहां चार बिजली उत्पादन इकाइयों में कुल आठ टरबाइन मशीनें लगी हैं, जिन्हें नियमित संचालन के लिए प्रतिदिन लगभग 5400 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती है। मौजूदा हालात में पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने के कारण सभी मशीनों को पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं हो पा रहा है।
उत्पादन को संतुलित रखने के लिए प्रत्येक इकाई की एक-एक मशीन को बंद रखना पड़ रहा है, जिससे कुल बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हाइडल परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में इन इकाइयों से महज़ लगभग 30 प्रतिशत बिजली ही उत्पन्न की जा रही है। इससे ग्रिड को मिलने वाली आपूर्ति में कमी आई है।
अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों में जमी बर्फ के पिघलने के बाद ही यमुना के प्रवाह में स्थायी सुधार संभव है। मौसम विभाग और जल संसाधन विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार फरवरी माह तक हथनीकुंड बैराज पर पानी की आवक सामान्य से कम बनी रह सकती है। प्रशासनिक स्तर पर हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार