हिसार : एक परियोजना, एक टीम व एकीकृत समयबद्धता की भावना से कार्य करें : वीरेंद्र बड़खालसा

 


हकृवि में उपचारित अपशिष्ट जल सिंचाई परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित

हिसार, 09 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा में कृषि क्षेत्र के लिए जल की उपलब्धता

सुनिश्चित करने, भूजल संरक्षण तथा सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा

में राज्य सरकार द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उपचारित अपशिष्ट जल सिंचाई

परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे पनिहार-चौधरीवास स्मार्ट सिंचाई क्लस्टर की प्रगति

की समीक्षा के लिए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बुधवार काे बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता

मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र सिंह बड़खालसा ने की।

ओएसडी ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि एक

परियोजना, एक टीम और एकीकृत समयबद्धता की भावना से कार्य करते हुए निर्धारित समय में

गुणवत्तापूर्ण परिणाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण

और कृषि के लिए वैकल्पिक जल स्रोतों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना समय की जरूरत

है। पनिहार-चौधरीवास की तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी स्मार्ट, आधुनिक और

टिकाऊ सिंचाई क्लस्टर विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सिंचाई क्षेत्र में नई

तकनीक और टिकाऊ जल प्रबंधन समाधानों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल

है।

परियोजना के तहत गांव सतरोड़ और डाबड़ा में स्थापित तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

से प्रतिदिन करीब 17 एमएलडी उपचारित अपशिष्ट जल को बंद पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम

से कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना है। इससे करीब 1700 हेक्टेयर कृषि भूमि की

सिंचाई होगी और लगभग 971 किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। हकृवि के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि कृषि क्षेत्र में जल की उपलब्धता

और भूजल संरक्षण दो प्रमुख चुनौतियां हैं। ऐसे में उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित

और वैज्ञानिक उपयोग पर आधारित यह मॉडल सिंचाई के लिए वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराने

के साथ-साथ भूजल पर दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने परियोजना की प्रगति और किसान संबंध एजेंसी

के रूप में हकृवि की भूमिका की जानकारी दी। बैठक में पनिहार-चौधरीवास मॉडल को प्रदेश

के अन्य जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों

और विशेषज्ञों ने परियोजना की तकनीकी प्रगति, उपचारित जल के पुन: उपयोग, पाइपलाइन नेटवर्क,

किसान सहभागिता तथा दीर्घकालीन संचालन एवं रखरखाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श

किया। इस अवसर पर मिकाडा के एसडीई कपिल मूंड, चीफ इंजीनियर एसडी शर्मा, वॉटर यूजर

सोसायटी के अध्यक्ष सुरेश कुमार, डॉ. सुरेंद्र धनखड़, डॉ. दलीप बिश्नोई सहित संबंधित

विभागों के अधिकारी, विशेषज्ञ एवं किसान उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर