विधान सभा परिसर में समानांतर सदन चलाने पर भूपेंद्र हुड्डा से जवाब तलब
विशेष सत्र को असंवैधानिक बताने पर भी मांगा जवाब, मुख्य सचिव से भी इस मामले में मांगी गई टिप्पणी
चंडीगढ़, 28 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा विधान सभा परिसर में समानांतर सदन चलाने तथा विधान सभा सत्र को असंवैधानिक बताने पर पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा नए विवाद में फंस गए हैं। विधान सभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने इसे गंभीरता से लेते हुए विपक्ष के नेता को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता से पूछा कि उन्होंने किस आधार पर विधान सभा के विशेष सत्र को असंवैधानिक बताया और किस अधिकार अथवा नियम के तहत विधानसभा परिसर में विधायकों को इकट्ठा करते हुए समानांतर सदन की कार्यवाही का संचालन किया।
हरियाणा विधान सभा के अध्यक्ष की ओर से ऐसी कड़ी कार्रवाई पहली बार की गई है। हालांकि पूर्व में भी विपक्ष द्वारा विधानसभा परिसर में समानांतर सदन चलाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है। ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार द्वारा बुलाए गए विधान सभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को असंवैधानिक करार देते हुए उसके बहिष्कार की घोषणा कर दी थी और विधानसभा परिसर में समानांतर सदन चलाया था।
अध्यक्ष कल्याण ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ-साथ हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव से भी इस विषय पर टिप्पणी मांगी है। विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायकों को विधानसभा परिसर में इकट्ठा करने का कृत्य न केवल संसदीय परंपराओं के विपरीत है, बल्कि विधान सभा की गरिमा और स्थापित प्रक्रियाओं व नियमों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से पूछा है कि उन्होंने किन नियमों व संसदीय प्रथाओं के तहत इस प्रकार की अवांछित गतिविधि की है।
विधान सभा अध्यक्ष की ओर से लिखे पत्र में यह भी पूछा गया है कि 27 अप्रैल को आयोजित हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र व उसकी कार्यवाही को उनके द्वारा किस संवैधानिक या प्रक्रियात्मक आधार पर असंवैधानिक करार दिया गया। इसके अतिरिक्त, सदन में नारी सशक्तीकरण वंदन संशोधन अधिनियम के समर्थन में प्रस्तुत सरकारी प्रस्ताव को ‘असंवैधानिक’ बताने के पीछे क्या ठोस आधार हैं।
कल्याण ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही संविधान, नियमों और स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित होती है और किसी भी प्रकार की समानांतर या भ्रामक गतिविधि लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा इनके सदस्यों की गरिमा व प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा जताई है कि वे इस विषय पर शीघ्र और स्पष्ट जवाब देकर स्थिति को स्पष्ट करेंगे, ताकि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा