हिसार : कृषि मेला केवल ज्ञान एवं तकनीक के आदान-प्रदान का मंच ही नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, समर्पण और नवाचार का उत्सव : नायब सैनी
देश के खाद्यान्न उत्पादन में हरियाणा अग्रणी राज्य मुख्यमंत्री ने किया हकृवि में दो दिवसीय कृषि मेले का शुभारंभ हिसार, 23 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि कृषि मेला केवल ज्ञान एवं तकनीक के आदान-प्रदान का मंच नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, समर्पण और नवाचार का उत्सव है। उन्होंने कहा कि हरियाणा आज देश के खाद्यान्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिसका श्रेय किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार की समन्वित नीतियों को जाता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में दो दिवसीय कृषि मेला खरीफ का उद्घाटन के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। मेले में कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य मंत्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि रहे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने की। इस वर्ष कृषि मेले का थीम सतत कृषि: समृद्धि की राह रखा गया है। मुख्यमंत्री ने मेला परिसर में अमर शहीदों भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को पुष्पांजलि भी अर्पित की। उन्होंने डिजिटल कृषि, ड्रोन तकनीक एवं क्लाईमेट स्मार्ट फार्मिंग को अपनाने पर बल देते हुए युवाओं से कृषि को व्यवसाय एवं स्टार्टअप के रूप में अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए किसानों को मृदा परीक्षण एवं संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया।दलहनी एवं तिलहनी फसलों की पैदावार बढ़ाने की आवश्यकता: श्याम सिंह राणाकृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों को संबोधित करते हुए फसल विविधीकरण और जल संरक्षण के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और घटते जल संसाधनों के बीच किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दलहनी एवं तिलहनी फसलों की पैदावार बढ़ाने की दिशा में आगे आना चाहिए, जिससे मृदा की उर्वरता में सुधार होगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह खेती पद्धति पर्यावरण के अनुकूल, रसायन-मुक्त और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ है। इस संदर्भ में उन्होंने किसानों को देसी गाय पालन को बढ़ावा देने की सलाह दी। किसानों की समृद्धि ही प्रदेश और देश की समृद्धि का आधार : प्रो. बीआर कम्बोजकुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण और जल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनका समाधान केवल सतत एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर ही संभव है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे माइक्रो-इरिगेशन, सीधी बीजित धान, फसल विविधीकरण तथा डिजिटल कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत, रोगरोधी, तापमानरोधी, कम पानी एवं कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में, किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने हरियाणा की कृषि उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1966 में जहां खाद्यान्न उत्पादन 25.92 लाख टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढक़र 206 लाख टन हो गया है और आज हरियाणा देश के केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि बासमती चावल के निर्यात में हरियाणा का विशेष स्थान है, जहाँ से देश का 60 प्रतिशत से अधिक बासमती निर्यात होता है, तथा बाजरा, दलहन और तिलहन उत्पादन में भी राज्य अग्रणी है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर