हरियाणा में ट्रैवल एजेंसी चलाने काे पंजीकरण जरूरी
-डंकी रूट जैसी गतिविधियों पर लगेगी लगाम, सभी एजेंटों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य
-कैबिनेट ने ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन नियम-2026 को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 03 नवंबर (हि.स.)। हरियाणा में युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाले और अवैध तरीके से विदेश भेजने का धंधा चलाने वाले ट्रैवल एजेंटों पर अब शिकंजा कसेगा। प्रदेश में बिना सरकारी पंजीकरण के ट्रैवल एजेंट का कारोबार नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक एजेंट का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम 2025 के तहत हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन नियम 2026 को मंजूरी दी गई।
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य विदेश में नौकरी और पढ़ाई का झांसा देकर युवाओं से धोखाधड़ी करने, अवैध विदेश भर्ती, मानव तस्करी और डंकी रूट जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। नए नियम प्रदेश में पहले से कारोबार कर रहे और नए सभी ट्रैवल एजेंटों पर लागू होंगे। हरियाणा सरकार ने ट्रैवल एजेंटों की जवाबदेही तय करने के लिए कई प्रविधान किए हैं। इनके तहत प्रत्येक कार्यालय और शाखा के लिए अलग पंजीकरण कराना होगा। इसी तरह प्रत्येक सेवा श्रेणी के लिए भी अलग-अलग पंजीकरण अनिवार्य होगा।
हरियाणा सरकार के इन प्रविधानों से ट्रैवल एजेंटों के कारोबार की पहचान और निगरानी आसान होगी। साथ ही, विदेश जाने के इच्छुक युवाओं को किसी एजेंट की वैधता जांचने का अधिकार मिलेगा, जिससे फर्जी एजेंटों के जरिए होने वाली ठगी और अवैध विदेश भेजने के मामलों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
नए नियमाें के अनुसार प्रदेश में ट्रैवल एजेंसी का कारोबार करने वाले सभी नए और पुराने एजेंटों को पंजीकरण कराना होगा। पासपोर्ट सेवाएं, टूर एवं ट्रैवल एजेंसी, स्टडी वीजा कंसल्टेंसी और टिकटिंग सेवाओं के लिए अलग पंजीकरण जरूरी होगा। पंजीकरण से पहले प्रत्येक आवेदक की पुलिस जांच होगी। पुलिस सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी 30 दिनों के भीतर प्रमाणपत्र जारी करेगा। प्रत्येक सेवा श्रेणी के लिए 5,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र तीन वर्ष तक मान्य रहेगा। एजेंटों को अपने कार्यालय के अंदर और बाहर पंजीकरण संख्या तथा प्रमाणपत्र जारी होने और समाप्त होने की तारीख प्रदर्शित करनी होगी। एजेंटों को अपने विज्ञापनों, वेबसाइट और अन्य आनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण संख्या अंकित करनी होगी।
फर्जी एजेंटों के जाल से आम नागरिकों को बचाने के लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रत्येक पंजीकृत एजेंट को क्यूआर कोड युक्त डिजिटल प्रमाणपत्र दिया जाएगा। नागरिक इसे स्कैन कर एजेंट के पंजीकरण की प्रामाणिकता और वैधता की जांच कर सकेंगे। इसके अलावा पंजीकृत एजेंटों की जिलावार सूची और उनके प्रमाणपत्र अंत्योदय सरल पोर्टल, गृह विभाग तथा पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध करवाए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा