हिसार : हकृवि ने कृषि, डेयरी व मशरूम के क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए : प्रो. बीआार कम्बोज

 


हकृवि ने एबिक के स्टार्टअप्स को अनुदान राशि

जारी की

हिसार, 22 मार्च (हि.स.)। हिसार स्थित हरियाणा

कृषि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शोध करना नहीं बल्कि शोध को किसानों और उद्योगों

तक पहुंचना है। विश्वविद्यालय ने कृषि, डेयरी और मशरूम के क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता

को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

यह बात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बीआर कम्बोज

ने रविवार काे एग्री बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर (एबिक) के अंतर्गत तीन नवाचार आधारित स्टार्टअप को

स्वीकृत अनुदान राशि के चेक वितरित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय

का उद्देश्य कृषि आधारित स्टार्टअप को मजबूत प्लेटफार्म प्रदान करना है,जिससे नई तकनीकें

किसानों और पशुपालकों तक तेजी से पहुंच सके। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के माध्यम से

कृषि डेयरी और मशरूम उत्पादन जैसे अन्य क्षेत्रों में आधुनिक समाधान विकसित हो रहे

हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने और लागत कम करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा

कि भविष्य में एबिक द्वारा और अधिक नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जाएगा जिससे युवा उद्यमियों

को रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिलेंगे।

एबिक के नियंत्रण अधिकारी एवं अनुसंधान निदेशक

डॉ. राजबीर गर्ग ने स्टार्टअप्स के लिए प्रदान की गई अनुदान राशि के बारे में जानकारी

देते हुए बताया कि वनपरोज एग्रोवेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रबुद्ध मिश्रा को

आठ लाख रुपए की किस्त प्रदान की गई है। यह स्टार्टअप पोटैशियम हयूमेट आधारित उत्पाद

बना रहा है जो मिट्टी की भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणवत्ता को बेहतर बनाकर फसल की

वृद्धि, पोषक तत्वों के अवशोषण तथा उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करता है। इसी प्रकार

वट सर्व एनिमल केयर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सजल श्रीवास्तव को 10 लाख रुपए की किस्त

जारी की गई। इस स्टार्टअप ने डेयरी पशुओं में होने वाले थनैला रोग की पहचान और नियंत्रण

के लिए उन्नत डायग्नोस्टिक आधारित तकनीक से लैब स्थापित की है। यह प्रणाली सब क्लीनिकल

मास्टर टेस्ट का पता लगाने में सहायक है जिससे किसान अपने दूध उत्पादन में वृद्धि करके

आय में बढ़ोतरी कर सकता है। रॉयल मशरूम एंड वेजिटेबल एलएलपी के निदेशक अंकित कुमार

को भी उनकी परियोजना के लिए दूसरी किस्त का दो लाख रूपए का चेक प्रदान किया गया। यह

स्टार्टअप इंडोर विधि से मशरूम उत्पादन के लिए पोषक तत्वों से भरपूर पास्चुरीकृत कंपोस्ट

और मशरूम ग्रोइंग किट बना कर रहा है जिससे छोटे स्तर पर भी मशरूम उत्पादन को सरल और

सुविधाजनक बनाए जा सकेगा।

एबिक के निदेशक डॉ. राजेश गेरा ने बताया कि कहा

कि एग्री बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से स्टार्टअप को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण

और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस सेंटर द्वारा प्रदान

की गई ट्रेनिंग का उद्देश्य कृषि, डेयरी और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नई तकनीक

को बढ़ावा देना है ताकि किसानों और पशुपालकों को आधुनिक समाधान उपलब्ध हो सके और उनकी

आय में बढ़ोतरी हो सके। यह विश्वविद्यालय और स्टार्टअप एक दूसरे के साथ मिलकर किसानों

की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान

दे रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर