हिसार : हरियाणवी संस्कृति को दीवारों पर सजाएंगे कढ़ाईदार पैनल, तीन डिजाइनों को मिला डिजाइन संरक्षण

 


हकृवि की शोधार्थी ने खेती, पशुपालन, लोक परंपराओं और त्योहारों को कढ़ाई के

जरिए दिया नया रूप

सजावट के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी उपयोगी

हिसार, 25 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा की पारंपरिक संस्कृति, ग्रामीण जीवनशैली

और लोक परंपराओं को अब कढ़ाईदार दीवार पैनल के जरिए घरों और अन्य स्थानों की सजावट

में नई पहचान दी जा सकेगी। यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान

महाविद्यालय की शोधार्थी मीनाक्षी शर्मा ने डॉ. पारुल गिल के मार्गदर्शन में कढ़ाईदार

दीवार पैनल के तीन अलग-अलग डिजाइन तैयार किए हैं, जिन्हें डिजाइन संरक्षण प्रदान किया

गया है। इन पैनलों में हरियाणवी जीवन के उन पहलुओं को रचनात्मक रूप में उकेरा गया है,

जो प्रदेश की पारंपरिक पहचान का हिस्सा रहे हैं।

पैनल के डिजाइनों में घर के कामकाज, खेती, पशुपालन, नाच-गाना, रीति-रिवाज,

त्योहार, पारंपरिक इमारतों एवं संरचनाओं, शिल्प, खेल तथा ग्रामीण जीवन से जुड़ी विभिन्न

गतिविधियों को चित्रों और पेंटिंग्स के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इनसे संबंधित

सामग्री विभिन्न सेकेंडरी स्रोतों से एकत्रित कर उसे कढ़ाई के माध्यम से आकर्षक दीवार

पैनल के रूप में विकसित किया गया। इस तरह ये पैनल केवल सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि हरियाणा

की लोक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम

भी बन सकते हैं।

सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. मोनिका शर्मा ने बताया कि

इन डिजाइनों में हरियाणा की समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को नए रचनात्मक स्वरूप

में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इनका उपयोग घरों, संस्थानों तथा अन्य स्थानों

की आंतरिक सजावट में किया जा सकता है। साथ ही ऐसे पारंपरिक डिजाइनों को बाजार से जोड़कर

हस्तशिल्प और कढ़ाई से जुड़े कार्यों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने शुक्रवार काे इस उपलब्धि पर शोधार्थी मीनाक्षी

शर्मा और डॉ. पारुल गिल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि रचनात्मक कार्यों और नए विचारों

को बौद्धिक संपदा के रूप में संरक्षित करना अनुसंधान एवं नवाचार को मजबूत करने की दिशा

में महत्वपूर्ण कदम है। विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों को नवीन और

उपयोगी रचनात्मक कार्यों के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस अवसर पर ओएसडी

डॉ. अतुल ढींगड़ा, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक, डॉ. नीलम रोज और डॉ.

योगेश जिंदल उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर