हिसार : किसानों के हित में बेहतर समन्वय से कार्य करें अनुसंधान एवं औद्योगिक संस्थान : प्रो. सोमनाथ सचदेवा

 




हकृवि में स्पार्क परियोजना के अंतर्गत तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरूहिसार, 25 फरवरी (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के इंदिरा गांधी ऑडिटोरियम में ‘डेसीफरिंग दी पोटेंशियल ऑफ क्लाइमेट रेजिलिएंट फंक्शनल क्रॉप फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड एग्रो-इंडस्ट्रीज (डीपीसीएफसी-एसएएआई-2026)’ विषय पर स्पार्क परियोजना के अंतर्गत तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे जबकि हकृवि के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे। यह सम्मेलन शिक्षा मंत्रालय की ‘स्पार्क’ परियोजना के अंतर्गत मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूज़ीलैंड के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बुधवार काे विश्वविद्यालयों की अनुसंधान एवं औद्योगिक संस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने पर बल दिया ताकि विकसित तकनीकों का वास्तविक लाभ किसानों को मिल सके। उन्होंने कृषि और उद्योग के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के सहनशील फसलें न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेंगी। कृषि क्षेत्र के समक्ष जलवायु परिवर्तन, भूमि की घटती उर्वरता, जल संकट और पोषण असंतुलन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिकों को अधिक बेहतर ढंग से कार्य करने की आवश्यकता है। सम्मेलन में शोधार्थियों को प्रख्यात वैज्ञानिकों से सीखने का मिलेगा मौका : प्रो. बीआर कम्बोजकार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हकृवि के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि सतत कृषि और एग्रो इंडस्ट्रीज के विकास के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीक के विकास और प्रसार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय सतत् कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने और किसानों तक वैज्ञानिक उपलब्धियों को पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों को तत्काल किसानों तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। कुलपति ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों 600 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जिनमें मुख्य रूप से मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूज़ीलैंड से डॉ. क्रेग मैकगिल, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा से डॉ. देवकी नंदन, ग्रो फर्दर, यूएसए से डॉ. पीटर केली, पीएयू, लुधियाना के पूर्व अनुसंधान निदेशक डॉ. नवतेज सिंह बैंस, डीआर एवं डीन पीजीएस, एमएचयू, करनाल से डॉ. धरम पाल, नाबी, मोहाली डॉ. शिवराज हरिराम निले तथा गडवासू, लुधियाना से डॉ. प्रभजीत सिंह शामिल हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिनमें एब्स्ट्रैक्ट बुक, लीड पेपर बुक, मोरिंगा पर प्रशिक्षण पुस्तिका तथा मोनोग्राफ विशेष रूप से शामिल रहीं।जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए जिनोमिक्स आधारित शोध करे वैज्ञानिक: डॉ. सुजय रक्षितमुख्य वक्ता भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने जिनोमिक्स तथा सूक्ष्मजीव आधारित समाधानों के एकीकृत प्रयोग पर बल दिया ताकि जलवायु परिवर्तन से बेहतर ढंग से निपटा जा सके। सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, कृषि विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में जलवायु लचीली फसलों के विकास, जैव प्रौद्योगिकी, पोषण संवर्धन, मूल्य संवर्धन एवं एग्रो इंडस्ट्रीज में उनकी उपयोगिता जैसी विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर