हिसार : सिद्धमुख ब्रांच नहर ने मचाई तबाही, 50 ढाणियां पानी में डूबी

 




नहर का तटबंध टूटते ही खेतों और रिहायशी इलाकों में घुसा पानी

हिसार, 30 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के गांव कालीरावण में सिद्धमुख ब्रांच नहर

टूटने से भारी तबाही मच गई। नहर का तटबंध पानी का दबाव नहीं झेल पाया और उसमें अचानक

बड़ा कटाव आ गया। देखते ही देखते नहर का पानी तेज बहाव के साथ आसपास के खेतों और ढाणियों

में घुस गया। हालात इतने बिगड़ गए कि करीब 50 ढाणियां जलमग्न हो गईं। खेतों से लेकर

रिहायशी इलाकों तक पानी ही पानी नजर आने लगा। अचानक आई इस आफत से ग्रामीणों में हड़कंप

मच गया।

कालीरावण गांव के पास शुक्रवार दोपहर को यह नहर टूटने के बाद पानी का बहाव

लगातार प्रभावित क्षेत्र की ओर बढ़ता रहा। ढाणियों में पानी घुसने से लोगों के सामने

अपने परिवार और पशुधन को सुरक्षित निकालने की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे मुश्किल हालात

में ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालते हुए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। लोग पानी

से घिरी ढाणियों से परिवारों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए।

दूसरी ओर, मिट्टी से भरी बोरियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से नहर के कटाव को बंद

करने की मशक्कत शुरू की गई।

ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह नहर में पानी का स्तर करीब 13 फीट था। कटाव होने

के बाद भी मौके पर लगभग 8 फीट पानी का बहाव बना हुआ है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि

जल्द ही पानी का बहाव पूरी तरह नहीं रोका गया तो हजारों एकड़ कृषि भूमि और सैकड़ों

मकानों को भारी नुकसान हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नहर में पानी का बहाव पूरी

तरह बंद होने में शनिवार तक का समय लग सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र के लोगों

की चिंता लगातार बढ़ रही है।

नहर के कटाव को बंद करने के लिए कालीरावण और आसपास के गांवों से नरेगा कर्मियों

को मौके पर बुलाया गया है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी

भी घटनास्थल पर पहुंचकर मरम्मत एवं राहत कार्य में जुटे हैं। ग्रामीणों के सहयोग से

कटाव को भरने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

नहर टूटने से पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां की ढाणी सहित अमर सिंह, महाबीर, बेगराज,

मांगेराम और रामफल की ढाणियां पानी की चपेट में आ गई हैं। कई घरों में पानी भरने से

लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीण अपने जरूरी सामान और पशुधन को बचाने

के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। गांव के पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते

हुए कहा कि नहर टूटने के बाद प्रशासन की ओर से समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो नुकसान

को काफी हद तक कम किया जा सकता था।

फिलहाल कालीरावण में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ ग्रामीण अपने घरों,

पशुओं और फसलों को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ सिंचाई विभाग की

टीम नहर के कटाव को बंद करने में लगी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर