हिसार : नरमा फसल को गुलाबी सुंडी के प्रकोप से बचाने के लिए आपसी तालमेल के साथ कार्य करने की जरूरत : प्रो. बीआर कम्बोज

 


कपास वैज्ञानिकों,

कृषि अधिकारियों, निजी बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों ने की गुलाबी सुंडी के प्रकोप

की समीक्षा

हकृवि में गुलाबी

सुंडी प्रबंधन के लिए समीक्षा बैठक आयोजित

हिसार, 27 मार्च

(हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा है कि देश

के उत्तरी क्षेत्र में कपास की फसल में गुलाबी सुंडी की समस्या पर किसान व कृषि वैज्ञानिक

लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसके समाधान के लिए सभी हितधारक मिलकर कार्य करें ताकि किसानों

को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

कुलपति प्रो. बीआर

कम्बोज शुक्रवार को विश्वविद्यालय में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालयों

के कपास वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, निजी बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों व किसानों

के लिए अनुसंधान निदेशालय द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने

कहा कि कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के नियंत्रण के लिए हितधारकों के साथ मिलकर सामूहिक

प्रयास करने होंगे। किसानों को गुलाबी सुंडी के बारे में जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण

कार्यक्रम के लिए भी विस्तृत विचार विमर्श किया गया। कुलपति ने संबंधित वैज्ञानिकों

एवं अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे क्षेत्र में नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के

साथ-साथ किसानों को कीट प्रबंधन संबंधी नवीनतम तकनीकों एवं सावधानियों की जानकारी उपलब्ध

कराएं। गुलाबी सुंडी के प्रभावी नियंत्रण के लिए समय पर निगरानी, उचित कीटनाशकों का

प्रयोग तथा समन्वित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ

ही किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और खेत स्तर पर निरीक्षण के

माध्यम से जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा किसानों को समय-समय पर सलाह

जारी करने और आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन प्रदान करने के भी निर्देश दिए गए। कुलपति ने

कहा कि किसान कपास फसल की बिजाई (15 अप्रैल से 15 मई) समय पर करना सुनिश्चित करें क्योंकि

देर से बिजाई करने पर फसल में गुलाबी सुंडी का प्रकोप अधिक होता है। उन्होंने प्रमाणित

एवं अनुशंसित बीजों का प्रयोग करने, समय-समय पर फसल का निरीक्षण करने, संक्रमित टीड़ों

को तोडक़र खेत से बाहर नष्ट करने, फसल चक्र अपनानें तथा फसल अवशेष एवं डंठलों को उखाड़

कर नष्ट करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान अपने खेत में पड़ी नरमा की बनछटियों

को बिजाई से पहले इन्हें अच्छी तरह से झाड़ कर रख लें और इनके अधखिले टिंडों एवं सुखे

कचरे को नष्ट कर दें ताकि इन बनछटियों से निकलने वाली गुलाबी सुंडी को रोका जा सके।

उन्होंने बताया कि नरमा की बिजाई विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित बी टी संकर किस्म को

15 मई तक पूरी करें एवं कीटनाशकों एवं फफूंद नाशकों को मिलाकर छिडक़ाव ना करें।

विश्वविद्यालय के

अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बैठक में सभी का स्वागत किया और हरियाणा प्रदेश

के कपास परिदृश्य की रिपोर्ट प्रस्तुत की। पंजाब राज्य की कपास से संबंधित रिपोर्ट

डॉ विजय कुमार तथा राजस्थान की रिपोर्ट डॉ हरमिंदर सिंह ने प्रस्तुत की। कृषि एवं किसान

कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक (कपास) डॉ. राम प्रताप सिहाग ने गुलाबी सुंडी की रोकथाम

के लिए किए जाने वाले समुचित प्रबन्धों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में

डॉ. ऋषि कुमार ने उत्तरी क्षेत्र के कपास परिदृश्य के बारे में बताया जबकि विश्वविद्यालय

के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रमेश कुमार यादव ने कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा कपास

के बारे में की जाने वाली गतिविधियों के बारे में बताया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर