हिसार : सूचना के प्रति जागरूक और सजग रहना समय की आवश्यकता

 


राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण

मीडिया साक्षरता, जिम्मेदार पत्रकारिता और सामाजिक

संवाद को मजबूत करने पर दिया जोर

हिसार, 07 अक्टूबर (हि.स.)। डिजिटल युग में सूचनाओं

का प्रवाह तेजी से बढ़ा है, लेकिन ऐसे समय में सूचना की विश्वसनीयता को समझना और उसके

प्रति जागरूक रहना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। आज व्यक्ति लगातार मोबाइल

और डिजिटल माध्यमों के संपर्क में है, जिसका प्रभाव उसके व्यवहार, सोच, सामाजिक संबंधों

और जीवनशैली पर भी पड़ रहा है। इसलिए आवश्यकता केवल अधिक से अधिक सूचना प्राप्त करने

की नहीं, बल्कि सही सूचना को पहचानने, उसकी सत्यता जांचने और उसका जिम्मेदारी के साथ

उपयोग करने की है।

यह बात गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

विश्वविद्यालय के जन संचार विभाग द्वारा राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका पर आयोजित

एक दिवसीय संगोष्ठी में गुरुग्राम विश्वविद्यालय के मीडिया स्टडीज विभाग के अध्यक्ष

प्रोफेसर राकेश कुमार योगी ने जनसंचार के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सम्बोधित

करते हुए कही। प्रोफेसर राकेश कुमार ने कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों, शिक्षकों

और मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समाज को मीडिया साक्षर बनाने में अपना

योगदान दें। सही सूचना क्या है, सूचना के स्रोत की जांच कैसे की जाती है और डिजिटल

सामग्री को जिम्मेदारी के साथ किस प्रकार ग्रहण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज

लोग बहुत कुछ सुन और देख रहे हैं, लेकिन उसे समझने और आत्मसात करने के लिए पर्याप्त

समय नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलते डिजिटल

परिवेश में विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद बनाए रखना जरूरी है। वर्तमान समय में बुजुर्ग

पीढ़ी भी सूचनाओं की तेज गति और बदलती सामाजिक परिस्थितियों से प्रभावित हो रही है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो यशपाल

सिंगला ने अपने संबोधन में कहा कि व्यक्ति के विचार, सपने और भावनाएं उसकी अपनी भाषा

में सबसे सहज रूप से अभिव्यक्त होती हैं। दूसरी भाषा में विचारों को प्रस्तुत करने

पर कई बार उनकी मौलिकता और भाव प्रभावित हो सकते हैं।

संकायाध्यक्ष प्रो ज्योतसना कम्बोज ने कहा कि

विकास आवश्यक है, लेकिन यह प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर होना चाहिए। केवल देखा-देखी

में कंक्रीट और सड़कों का विस्तार करना ही विकास नहीं है। ऐसा विकास मॉडल अपनाने की

आवश्यकता है, जिसमें पर्यावरण, समाज, परिवार, संस्कृति और मानव जीवन के बीच संतुलन

बना रहे।

जन संचार विभागाध्यक्ष डॉ. ए. राम पांडे ने कहा

कि पत्रकारिता का दायित्व है कि बिना किसी

भय के आमजन की आवाज और उनकी समस्याओं को सत्ता एवं शासन तक पहुंचाया जाए, लेकिन इसके

साथ लोकहित और पत्रकारिता की मर्यादाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

डॉ. पांडे ने कहा कि प्रत्येक संचार माध्यम के

पीछे कोई न कोई उद्देश्य अथवा हित हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर