जींद : चांदपुुर जलघर के पानी का सैंपल फेल, लोग पी रहे बिना क्लोरीन युक्त पानी

 


जींद, 12 सितंबर (हि.स.)। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा स्वच्छ पेयजल को लेकर चांदपुर जलघर मेें पीने के पानी की जांच में सामने आया कि गांव में जलघर से मिलने वाली पीने की सप्लाई में क्लोरीन ही नही है और पानी का सैंपल फेल आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को भेज दी है।

स्वास्थ्य निरीक्षक नरेंद्र ढांडा ने शनिवार को बताया कि क्लोरीनीकरण एक प्रभावी और किफायती जल शोधन प्रक्रिया है। इसका मुख्य लाभ यह है कि पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और प्रोटोजोवा को नष्ट कर देती है। जिससे जल से पैदा होने वाली बीमारी हैजा, उल्टी, दस्त, पीलिया, टायफायड, पोलियो आदि बीमारियों से बचा जा सकता है। क्लोरीनीकरण करने से पानी से हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस व अन्य सूक्ष्म जीवों को मारकर पीने के पानी का कीटाणु रहित करता है। क्लोरीन पानी में मौजूद आयरन, मैगनीज और हाइड्रोजन सल्फाइड के आक्सीकरण में मदद करता है। जिससे पानी का रंग और गंद बेहतर बन जाता है। जिससे जलजनित बीमारियों को रोका जा सकता है।

इस प्रक्रिया से उपचारित पानी उपभोक्ता के घर तक सुरक्षित पहुंचता है। जिससे यह पानी पीने योग्य हो जाता है लेकिन नगूरां गांव के मुख्य जलघर और हसनपुर गांव के नलकूप नंबर एक को छोड़कर कहीं भी क्लोरीन युक्त पीने के पानी की सप्लाई नही की जा रही है। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग तथा जलघर पर कार्यरत कर्मचारी अनेक बार जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों को बुस्टर स्टेशनों पर डोङ्क्षजग पंप लगाने की गुहार लगा चुके हैं लेकिन अब तक नगूरां, चांदपुर तथा हसनपुर गांव में डोजिंग पंप नहीं लगे हैं। यही नही नगूरां गांव के सरपंच प्रतिनिधि कुलदीप खटकड़ ने जलापूर्ति विभाग के एसडीओ को डोजिंग पंप लगाने बारे पत्र लिखा है लेकिन अभी तक भी नगूरां गांव के बुस्टरों पर डोजिंग पंप लगने का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग सुपरवाइजर राजेश ने बताया कि विभाग में क्लोरीन की दवा आ चुकी है। जल्द की बूस्टरों पर डोजिंग पंप लगवानेे को लेकर विभाग टेंडर जारी करेगा। टेंडर के बाद ठेकेदार द्वारा सभी बुस्टरों पर डोजिंग पंप लगाए जाएगें। जल्द ही सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद लोगों को पीने का स्वच्छ पेयजल मिलेगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा