हिसार : किसानों पर दर्ज मुकदमे तुरंत प्रभाव से वापिस लें सरकार : संपत सिंह

 


हिसार, 28 मार्च (हि.स.)। इनेलो के राष्ट्रीय

सरंक्षक एवं पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने मांग की है कि हरियाणा सरकार किसान आंदोलन

(2020-21) के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमों में किसानों के विरूद्व जारी गैर-जमानती

गिरफ्तारी वांरट और जमानती गिरफ्तारी वारंट को तुरंत वापिस लें। उन्होंने कहा कि किसान

आंदोलन के समाप्त होने के समय भारत सरकार और संयुक्त किसान मोर्चा के बीच हुए लिखित

समझौते में यह स्पष्ट तय हुआ था कि किसानों के विरूद्व तीनों काले कानूनों को व आंदोलन

के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमों को तुरंत प्रभाव से वापिस लिया जाएगा।

संपत सिंह ने शनिवार काे कहा कि किसान आंदोलन के दौरान दर्ज

मुकदमों में किसान नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए जारी नोटिसों में सरकार की तानाशाही,

विश्वासघात और किसान विरोधी मानसिकता नजर आती है। किसान आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण

और लोकतांत्रिक था। उन्होंने कहा कि हिसार की अदालत ने हाल ही में किसान नेता व जिला

पार्षद प्रतिनिधि संदीप धीरणवास के खिलाफ एक गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट व किसान नेता

अनिल गौरछी समेत एक दर्जन किसानों के जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। इसी आंदोलन

के दौरान किसानों ने इन तीनों काले कानूनों के विरूद्व किसानों ने एक मंत्री का आर्यनगर

में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया था। इसी बात को लेकर मंत्री ने अपने किसी सहयोगी

से यह संगीन मुकदमा आजाद नगर थाने में दर्ज करवाया था। मुकदमा दर्ज होने के चार साल

बाद किसानों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी व जमानती गिरफ्तारी के वारंट पहुंचे हैं।

चार साल पुराने मामलों को खोदकर किसान नेताओं को निशाना बनाना एक सोची समझी साजिश हैं

ताकि किसानों को चुप करवाया जा सकें। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों किसानों ने ओलावृष्टि,

अधिक बरसात व ड्रैन के टूटने की वजह से फसल खराबे के लिए आंदोलन किया था।

संपत सिंह ने कहा कि इसी मंत्री ने इन नेताओं के खिलाफ

वारंट जारी करवाकर एक धोखे की पटकथा लिखी है। इसी मुकदमों के अंतर्गत गिरफ्तारी व गैर-जमानती

वांरट जारी किए गए। इन किसान नेताओं के खिलाफ इस तरह के वारंट जारी करवाकर किसान आंदोलन

की साख और नैतिकता पर सवालिया निशान है। वो भरोसा कहां गया जो देश के किसानों ने सरकार

पर किया था। यह वांरट अकेले इन्हीं किसानों के ही वारंट नहीं है बल्कि इसका प्रभाव

सभी किसानों पर पडे़गा। उन्होंने कहा कि सरकार की दमनकारी नीति से किसान दबने वाले

नहीं है। सरकार को तुरंत प्रभाव से सभी गिरफ्तारी वारंट रदद् करके और समझौते के अनुसार

सभी लम्बित मुकदमों को वापिस लिया जाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा हमेशा

किसानों के हितों के संघर्ष के लिए कटिबद्ध है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर