हिसार : सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही भाजपा सरकार : प्रो. संपत सिंह
पांच हजार सरकारी स्कूल बंद या मर्ज, माध्यमिक स्तर पर 40 हजार 971 शिक्षक
पद खाली होने का आरोप
शिक्षा बजट 13.37 से घटकर 8.15 प्रतिशत रह गया
हिसार, 14 सितंबर (हि.स.)। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व वित्त मंत्री
प्रो. संपत सिंह ने भाजपा नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार पर प्रदेश की सार्वजनिक शिक्षा
व्यवस्था को लगातार कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में
शिक्षकों की कमी, स्कूलों को बंद या मर्ज करना और शिक्षा बजट में कटौती का सीधा असर
गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरी में महंगे निजी
स्कूलों का रुख करना पड़ रहा है।
प्रो. संपत सिंह ने साेमवार काे कहा कि पिछले 12 वर्षों में करीब पांच हजार सरकारी प्राथमिक
विद्यालयों को बंद या दूसरे स्कूलों में मर्ज किया गया है। इसके चलते सैकड़ों स्कूलों
में विद्यार्थियों की संख्या 10 से कम रह गई है, जबकि एक हजार से अधिक स्कूलों में
केवल एक-एक शिक्षक रह गया है। उन्होंने कहा कि करीब छह हजार प्री-प्राइमरी सरकारी स्मार्ट
प्ले-वे स्कूल चौपालों और वृद्धाश्रमों में चल रहे हैं, जहां पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं
और प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से प्राथमिक
एवं अन्य शिक्षकों की नियमित भर्ती लगभग ठप रही है। सरकार बाद में अपने ही कुप्रबंधन
के कारण विद्यार्थियों की घटती संख्या का हवाला देकर शिक्षकों को सरप्लस घोषित करने
लगी। माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर करीब 34 प्रतिशत शिक्षक पद खाली हैं, जिनकी
संख्या 40 हजार 971 बताई गई है। शिक्षकों से अध्यापन के बजाय बीएलओ जैसी गैर-शैक्षणिक
जिम्मेदारियां भी ली जा रही हैं।
प्रो. संपत सिंह ने उच्च शिक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश
के 186 सरकारी महाविद्यालय गंभीर संस्थागत संकट से गुजर रहे हैं और करीब 60 प्रतिशत
सहायक प्रोफेसर के पद खाली हैं। कई कॉलेज जर्जर भवनों, मंदिरों के कमरों और टीन शेडों
में संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों का दाखिला
महज 29 प्रतिशत रह गया है। 53 कॉलेजों में 50 से कम विद्यार्थी दाखिल हुए हैं और कुछ
कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या एक अंक तक सिमट गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष
2013-14 में राज्य के कुल बजट का 13.37 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च होता था, जो अब घटकर
मात्र 8.15 प्रतिशत रह गया है। इसके चलते प्रदेश राष्ट्रीय साक्षरता के मामले में
20वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट में कटौती वास्तव में प्रदेश
की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में कटौती है।
प्रो. संपत सिंह ने सरकार से मांग की कि स्कूलों और कॉलेजों का संस्थागत ढांचा
मजबूत किया जाए, शिक्षकों एवं प्राध्यापकों के सभी रिक्त पदों को भरने के लिए बड़े
पैमाने पर भर्ती अभियान चलाया जाए तथा शिक्षा का बजट कुल राज्य बजट का कम से कम 15
प्रतिशत किया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर