टेली-ईसीजी सेवा बनी लाइफलाइन, 'गोल्डन ऑवर' में बची 131 जिंदगियां
600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शुरू हुई डिजिटल सेवा, 2,688 मरीजों को मिला लाभ
मात्र 89 रुपये में 10 मिनट में विशेषज्ञ रिपोर्ट, ग्रामीण मरीजों को घर के पास मिल रही सुविधा
चंडीगढ़, 10 जुलाई (हि.स.)। नायब सरकार की टेली-ईसीजी सेवा दिल के मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा 29 मई को शुरू की गई इस डिजिटल स्वास्थ्य पहल ने महज सवा महीने में ही 2,688 मरीजों को विशेषज्ञ हृदय जांच उपलब्ध कराई, जबकि 131 गंभीर मरीजों की समय रहते पहचान कर उन्हें 'गोल्डन ऑवर' में उपचार दिलाया गया। 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में लागू इस व्यवस्था के तहत मात्र 89 रुपये में 10 मिनट के भीतर कार्डियोलॉजिस्ट की ईसीजी रिपोर्ट उपलब्ध हो रही है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में यह तकनीक हृदय रोगियों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है तथा प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में नई क्रांति का आधार बन रही है।
टेली ईसीजी सेवा के तहत राज्य के 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को कवर किया गया है। इनमें 71 जिला नागरिक अस्पताल एवं उप-मंडल नागरिक अस्पताल, 121 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 408 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इस सेवा के चालू होने से अब ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को उनके घर के नजदीक ही विशेषज्ञ हृदय रोग निदान की सुविधा मिलने लगी है, जिससे मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी और इलाज में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा। चिकित्सा विज्ञान में दिल का दौरा पड़ने के बाद का पहला घंटा 'गोल्डन ऑवर' माना जाता है, जिसमें तुरंत इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है। यह टेली-ईसीजी सेवा इसी 'गोल्डन ऑवर' के दौरान मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य हृदय रोगों के कारण होने वाली अकाल मौतों में एक-तिहाई (1/3) तक की कमी लाना है। विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट की रिपोर्टिंग और परामर्श समय पर मिलने से मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
टेली-ईसीजी सेवा को पूरी तरह किफायती बनाया गया है। प्रति ईसीजी की दर मात्र 89 रुपये निर्धारित की गई है। इस न्यूनतम राशि में न केवल ईसीजी का संचालन शामिल है, बल्कि टेली-रिपोर्टिंग तकनीक के माध्यम से मात्र 10 मिनट के भीतर विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) द्वारा ईसीजी की व्याख्या और रिपोर्ट प्रदान करना भी सुनिश्चित किया गया है। 'राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम' के तहत नई पहलों और नवाचारों के अंतर्गत कुल 2.92 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
राज्य भर में सालाना लगभग 3,28,320 ईसीजी होंगे
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने बताया कि प्रदेश में जिला नागरिक अस्पतालों , उप-मंडल अस्पतालों , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कुल संख्या 192 है जिनमें प्रति केंद्र औसतन 100 ईसीजी प्रति माह होने का अनुमान है, जिससे सालाना 2,30,400 ईसीजी होंगे। इस पर 2.05 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी प्रकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 408 है जहां पर प्रति केंद्र औसतन 20 ईसीजी प्रति माह होने की उम्मीद है, जिससे सालाना 97,920 ईसीजी होंगे। इस पर करीब 87.14 लाख रुपये का खर्च आएगा। कुल मिलाकर राज्य भर में सालाना लगभग 3,28,320 ईसीजी किए जाने का अनुमान है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा