हिसार : 85 करोड़ का शराब घोटाला उजागर करने वाले टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश मेहरा को पदोन्नति
डिफॉल्टर फर्म को ठेके देने और अधिकारियों-ठेकेदारों
की कथित मिलीभगत का उठाया था मामला
एसीबी ने एफआईआर की सिफारिश की लेकिन सरकार के
पास लंबित है फैसला
हिसार, 06 नवंबर (हि.स.)। आबकारी एवं कराधान विभाग
में करोड़ों रुपये के शराब घोटाले और नियमों को ताक पर रखकर डिफॉल्टर फर्म को शराब
ठेके आवंटित करने का मामला उठाने वाले टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश मेहरा को पदोन्नति मिल
गई है। झज्जर में कार्यरत दिनेश मेहरा को सहायक आबकारी एवं कराधान अधिकारी (एईटीओ)
बनाया गया है।
हरियाणा सरकार की आबकारी एवं कराधान आयुक्त एवं
सचिव आशिमा बराड़ की ओर से जारी आदेशों के अनुसार उन्हें इस साल 25 मई से नॉशनल बेसिस
पर पदोन्नति दी गई है। उन्हें तुरंत प्रभाव से नया पदभार संभालने के निर्देश दिए गए
हैं। दिनेश मेहरा ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को
शिकायत भेजकर आबकारी विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की कथित मिलीभगत
का मामला उठाया था। शिकायत के अनुसार, मेसर्स जोरबा वाइन फर्म पर फतेहाबाद के ठेकों
की वर्ष 2018-19 की 34 लाख 6 हजार 800 रुपये की लाइसेंस फीस तथा वर्ष 2019-20 के
25 करोड़ रुपये बकाया थे। इसी फर्म पर हिसार के ठेकों की वर्ष 2019-20 तक करीब
11.55 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस भी बकाया थी।
डिफॉल्टर फर्म को नियमों के विपरीत दिए ठेके
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक्साइज एक्ट
1914 के प्रावधानों के अनुसार डिफॉल्टर घोषित फर्म अगले साल की नीलामी में भाग नहीं
ले सकती। इसके बावजूद तत्कालीन डीईटीसी वीके शास्त्री की कथित मिलीभगत से जोरबा वाइन
फर्म को फतेहाबाद में आवश्यक दस्तावेजों के बिना वर्ष 2018-19 में 21 करोड़ रुपये और
वर्ष 2019-20 में 38 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए। इसके अलावा वर्ष 2019-20 में हिसार
में भी फर्म को 26 करोड़ रुपये का कारोबार सौंपा गया।
एसीबी ने एफआईआर की सिफारिश की, सरकार के पास
लंबित है फैसला
दिनेश मेहरा की शिकायतों पर भ्रष्टाचार निरोधक
ब्यूरो (एसीबी) हिसार ने जांच की थी। जांच उपरांत 6 फरवरी 2025 को एसपी एसीबी हिसार
ने अंतिम जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीईटीसी वीके शास्त्री और शराब ठेकेदार तरुण कुमार
मेहता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी। इसके बाद 20 मार्च 2025 को एडीजीपी
एसीबी पंचकूला ने पत्र क्रमांक 4840/1-3/ACB (H) के माध्यम से मुख्य सचिव कार्यालय
के विजिलेंस विभाग से एफआईआर दर्ज करने की औपचारिक अनुमति मांगी थी। दिनेश मेहरा द्वारा
इस वर्ष 21 अप्रैल को दायर आरटीआई के जवाब में विजिलेंस विभाग ने 27 जुलाई को बताया
कि मामले में अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर लंबित है। विभाग के अनुसार, आबकारी आयुक्त
से मांगी गई टिप्पणी प्राप्त नहीं होने के कारण निर्णय में देरी हो रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर