हिसार : ईद-उल-अजहा त्याग, सद्भावना, प्यार और  भाईचारे का प्रतीक : शेख सिराजुद्दीन

 


हिसार, 28 मई (हि.स.)। कैमरी रोड पर नमाजे ईद-उल-अजहा

के अवसर पर सामूहिक नमाज का आयोजन किया गया। प्रचार प्रमुख शेख सिराजुद्दीन ने नमाज पढ़ाई। नमाज के बाद अपने अभिभाषण में शेख सिराजुदीन

ने गुरुवार को ईद उल अजहा की व्याख्या और विशेषता का जिक्र करते हुए कहा कि यह मुबारक

दिन हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माईल के उस महान त्याग की याद दिलाता है

जो उन्होंने ईश्वर की प्रसन्नता के लिए दिया था। जब हजरत इब्राहिम (अ.स.) ने ईश्वर

की रजा के लिए अपने प्यारे बेटे की कुरबानी देने का इरादा किया, तो उनके इस बेमिसाल

समर्पण और त्याग को अल्लाह ने हमेशा के लिए अमर कर दिया। कुरआन हमें सिखाता है कि पूरी

मानव जाति एक ही ईश्वर की संतान है। कुरआन की रोशनी में सच्ची धार्मिकता मानवता की

सेवा में है। आपसी भाईचारे और मेल-जोल को बढ़ावा देना ही धर्म का असल मकसद है। हजरत

मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कुरबानी और सच्चे मुसलमान के व्यवहार

को लेकर बेहद खूबसूरत मार्गदर्शन फरमाया है। हदीस में आता है ‘सच्चा मुसलमान वह है

जिसके हाथ और जुबान से समाज का हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे।’

शेख सिराजुद्दनी ने बताया कि हुजूर ने सिखाया

कि अल्लाह की राह में दी जाने वाली कुरबानी केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह इंसान के

भीतर दूसरों के लिए रहम, भलाई और सुरक्षा की भावना पैदा करने का जरिया है। हजरत मिर्जा

गुलाम अहमद कादियानी मसीह मौऊद व महदी मौऊद (अ.स.) के अनुसार, पशु की कुरबानी वास्तव

में इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य अपने भीतर के अहकार, स्वार्थ और नफरत को कुरबान

करे। उन्होने बताया कि आज के इस दौर में जमात अहमदिया के मौजूदा प्रमुख हजऱत मिर्जा

मसरूर अहमद साहब (अय्यदहुल्लाहो तआला बिनस्रिहिल अजीज) पूरी दुनिया को इसी कुरआनी भाईचारे

का पाठ पढ़ा रहे हैं। जमात अहमदिया का मूल मंत्र है ‘मोहब्बत सब के लिए, नफरत किसी

से नहीं।’ इस ईद के अवसर पर हजरत

मिर्जा मसरूर अहमद साहब की विशेष शिक्षाएं हमें यह मार्गदर्शन देती हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर