सुपवा के छात्रों ने अपनी प्लानिंग व आर्किटेक्चर प्रतिभा से कराया रूबरू
ज्यूरी के दौरान शैक्षणिक व रचनात्मक सीख को किया प्रस्तुत
ऐतिहासिक व जलवायु संवेदी वास्तुकला के साथ बनाए शहरी संरचना मॉडल
रोहतक, 24 मई (हि.स.)। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर के छात्रों ने पढ़ाई के दौरान सीखी अपनी प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर की प्रतिभा से ज्यूरी में पहुंचे एक्सटर्नल एक्सपर्ट्स को रूबरू कराया। छात्रों ने ज्यूरी के दौरान ऐतिहासिक संरचना व जलवायु संवेदी वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए शहरी संरचना मॉडल प्रस्तुत किए। जिनसे उनकी शैक्षणिक व रचनात्मक सीख नजर आई और ज्यूरी सदस्यों ने इसकी सराहना भी की। प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर फैकेल्टी के एफसी अजयबाहू जोशी ने बताया कि बैचलर इन आर्किटेक्चर द्वितीय वर्ष के छात्रों ने ग्राफिकल प्रस्तुतियों व वास्तुकला डिजाइन के जरिए गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया। ज्यूरी सदस्य प्रमुख वास्तुकार खुर्रम अली ने छात्रों द्वारा प्रयोग वॉटरकलर रेंडरिंग, पेंसिल रंग अनुप्रयोगों और पर्सपेक्टिव व्यूज के लिए डाइनामिक पेन स्केचिंग विधियों की सराहना की।
उन्होंने बताया कि बैचलर इन आर्किटेक्चर के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों की बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन व मेटेरियल्स ज्यूरी लेने आर्किटेक्ट डॉ प्रभजोत सिंह सग्गा पहुंचे। उनके अनुसार इस सेमेस्टर के छात्रों का पूरा ध्यान स्टील को निर्माण सामग्री के रूप में और अधिक बढ़ाने पर रहा। छात्रों ने ट्रस, मेजानाइन फ्लोर, रोलिंग शटर व कोलेप्सिबल डोर डिजाइन आदि का प्रदर्शन किया। एफसी जोशी के अनुसार आर्किटेक्चर के छठे सेमेस्टर की वर्किंग ड्रॉइंग्स ज्यूरी सदस्य के तौर पर सीपीडब्ल्यूडी के पूर्व मुख्य वास्तुकार रविंदर कुमार काकर पहुंचे। दशकों के उच्च स्तरीय सरकारी व अकादमिक सलाहकार अनुभव के साथ उन्होंने सुपवा के नवोदित वास्तुकारों का अनमोल मार्गदर्शन किया।
इस दौरान छात्रों ने 20 अत्यंत विस्तृत शीट्स वाले व्यापक, स्टूडियो पर्यवेक्षित निर्माण पोर्टफोलियो प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि चौथे सेमेस्टर के छात्रों ने किला ज़फरगढ़ की ऐतिहासिक बस्ती पर केंद्रित वर्नाक्युलर स्टूडियो के अपने व्यापक वास्तुशिल्प डिजाइन प्रोजेक्ट ज्यूरी में रखे। विस्तृत साइट विश्लेषण व क्षेत्रीय दस्तावेजीकरण से लेकर संवेदी भौतिक मॉडलों तक छात्रों ने पारंपरिक स्थानिक योजना, स्थानीय सामग्री का प्रदर्शन और संवेदनशील डिजाइन में गहरी दिलचस्पी दिखाई। इस दौरान डॉ ईवा पाराशर एक्सटर्नल एक्सपर्ट के तौर पर मौजूद रहीं। उन्होंने शहरी संरचना, ऐतिहासिक परिदृश्य व जलवायु संवेदी वास्तुकला में छात्रों की गहन समीक्षाओं और शैक्षणिक विशेषज्ञता की सराहना की।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल