प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले कलाकार व शोधकर्ता तैयार करेगी सुपवा : सीएम

 






सुपवा में आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में सीएम ने 81 साहित्यकारों को किया सम्मानित

चंडीगढ़, 23 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि डीएलसीसुपवा राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले कलाकार व शोधकर्ता तैयार करेगी, ऐसा उन्हें पूरा विश्वास है। सुपवा के लिए प्रदेश सरकार ने जिस तरह का सपना देखा था, वह साकार होने लगा है। यहां से होनहार प्रतिभाएं निकलकर देश-दुनिया में हरियाणा का नाम रोशन कर रही हैं।मुख्यमंत्री सूर्य कवि दादा लख्मी चंद की 123वीं जयंती के उपलक्ष्य में गुरुवार को दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में साहित्यकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। डीएलसीसुपवा ने हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फैकेल्टी ऑफ डिजाइन बिल्डिंग में डिजाइन व विजुअल आर्ट्स डिपार्टमेंट के छात्रों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में छात्रों ने अलग-अलग तरह के परिधान, स्कल्प्चर, एनीमेशन, पेंटिंग और एप्लाइड आर्ट के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति, कलात्मक सोच व प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए कलाकृतियां प्रदर्शित की थीं। मुख्यमंत्री ने कलाकृतियों के बारे में जानकारी ली और छात्रों की रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने हरियाणा साहित्य व संस्कृति अकादमी की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विभिन्न 40 श्रेणियों में कुल 81 साहित्यकारों को सम्मानित किया। साहित्यकारों को प्रमाण-पत्र, स्मृति चिन्ह एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।

बड़े पुरस्कारों की बात करें तो महेंद्रगढ़ के रोहित यादव को वर्ष 2021 के लिए तथा विनोद बब्बर को आजीवन साहित्य साधना पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं, साल 2021 के लिए वीएम बेचैन व साल 2022 के लिए डॉ. राजकला देशवाल को पंडित लख्मी चंद सम्मान प्रदान किया गया। मौके पर कुलगुरु डॉ. अमित आर्य ने मुख्यमंत्री को यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा तैयार किया गया उनका पोर्ट्रेट भेंट किया। साथ ही मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा को भी स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम के दौरान हरियाणा साहित्य व संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री व दादा लख्मी चंद के पौत्र विष्णु दत्त को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूर्य कवि पंडित लख्मी चंद केवल एक कवि नहीं, बल्कि हरियाणा की आत्मा व लोक संस्कृति के सशक्त प्रहरी थे। उनकी स्मृति में आयोजित इस समारोह में उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि जिस समाज का साहित्य जीवित रहता है, उसकी संस्कृति कभी समाप्त नहीं होती। सांस्कृतिक जड़ों को जितना मजबूत रखा जाएगा, समाज उतना ही सशक्त व सुरक्षित रहेगा।

मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने मंच से पंडित लख्मी चंद की रागिनी गाकर उन्हें याद किया। उन्होंने 'सुन ले मेरा ठिकाना रे, इस भारत के म हरियाणा रे' रागिनी की कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा कि पंडित लख्मी चंद मात्र 42 वर्ष की आयु में ही स्वर्गवासी हो गए थे। इतनी कम उम्र में ही उन्होंने अपनी रागनियों में जो बातें कही थीं, आज वह साकार होती दिखाई देती हैं।

हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि अकादमी दादा लख्मी चंद के नाम से प्रदेश का प्रतिष्ठित साहित्य सम्मान प्रदान करती है। इसलिए इस वर्ष यह निर्णय लिया गया कि सम्मान समारोह का आयोजन उनके नाम से संचालित यूनिवर्सिटी में किया जाए। उन्होंने कहा कि यहां कार्यक्रम आयोजित करना अत्यंत सुखद अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने डॉ. अमित आर्य को डीएलसीसुपवा का कुलगुरु बनाकर इस यूनिवर्सिटी की आत्मा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा