हिसार : रेलूराम पूनिया परिवार हत्याकांड में सोनिया-संजीव की समयपूर्व रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

 




पीड़ित परिवार ने रिहाई का किया विरोध, आठ हत्याओं की गंभीरता और दोषियों के

जेल आचरण को लेकर रखी दलीलें

हिसार, 08 अक्टूबर (हि.स.)। बरवाला के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके

परिवार के आठ सदस्यों की हत्या के मामले में दोषी सोनिया और संजीव कुमार की समयपूर्व

रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। पीड़ित

परिवार की ओर से दोनों दोषियों की रिहाई का विरोध किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें

सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता आइना वर्मा खोवाल और लाल बहादुर खोवाल ने

पक्ष रखा। उन्होंने गुरुवार काे यहां बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के उस आदेश

को चुनौती दी गई है, जिसमें दोषियों की समयपूर्व रिहाई के मामले पर पुनर्विचार करने

और उन्हें अंतरिम जमानत देने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पहले

ही नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांग चुका है।

पीड़ित पक्ष ने अपराध की गंभीरता का रखा हवाला

सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष ने अपराध की गंभीरता, दोषियों के जेल में आचरण,

सुधार की वास्तविक स्थिति और समयपूर्व रिहाई से पीड़ित परिवार व समाज पर पड़ने वाले

संभावित प्रभाव को अदालत के सामने रखा। अधिवक्ताओं ने कहा कि यह वर्ष 2001 में एक ही

परिवार के आठ सदस्यों की हत्या का मामला है। मृतकों में तीन नाबालिग बच्चे भी शामिल

थे, जिनमें करीब डेढ़ माह की बच्ची भी थी। पीड़ित पक्ष ने दलील दी कि लंबे समय तक जेल

में रहना अपने आप में समयपूर्व रिहाई का अधिकार नहीं देता। दोषी के पूरे जेल रिकॉर्ड,

अनुशासन, आचरण, आपराधिक गतिविधियों, वास्तविक सुधार और रिहाई के संभावित प्रभाव का

समग्र मूल्यांकन किया जाना जरूरी है।

रेलूराम पूनिया हत्याकांड में सोनिया और संजीव को प्रारंभ में मृत्युदंड की

सजा सुनाई गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में दया याचिकाओं के निस्तारण

में हुई देरी को आधार बनाते हुए मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया था। अब दोनों

की समयपूर्व रिहाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के

बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर