सोनीपत: देशसेवा में जीवन समर्पित करने वाले सुबेदार दलेल सिंह नहीं रहे

 


सोनीपत, 16 मार्च (हि.स.)। देश

की रक्षा में जीवन समर्पित करने वाले एक वीर सैनिक को अंतिम विदाई दी गई।

भारतीय सेना की ईएमई इकाई से सेवानिवृत्त सुबेदार दलेल सिंह का निधन होने से क्षेत्र

में शोक की लहर है। सैनिक जीवन में अनेक मोर्चों पर सेवा देने वाले इस कर्मयोद्धा ने

96 वर्ष की आयु में अपने पैतृक गांव झरोठ में अंतिम सांस ली। उनके पुत्र चांदवीर ने

पूरे सैन्य सम्मान के भाव के साथ उन्हें मुखाग्नि दी।

पूर्व

चेयरमेन राजीबर दहिया की पत्नी जिला परिषद की अध्यक्ष मोनिका दहिया के ताया ससुर सूबेदार

दलेल सिंह का सोमवार को उनके पैतृक गांव झरोठ में निधन हो गया। परिवार के अनुसार वह

पिछले कुछ दिनाें से अस्वस्थ चल रहे थे। सोमवार को घर पर ही उनका देहांत हो गया। गांव

झरोठ में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार

और परिचित अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

सूबेदार

दलेल सिंह का जन्म नौ मार्च 1930 को हुआ था। वह 22 जनवरी 1951 को भारतीय सेना में भर्ती

हुए और लंबे समय तक देश की सेवा करते रहे। सेना में उत्कृष्ट सेवाओं के बाद वह एक फरवरी

1981 को सेवानिवृत्त हुए। सैनिक जीवन के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में

सेवा दी और अपने कर्तव्यनिष्ठ कार्य के लिए कई सम्मान और पदक प्राप्त किए।

उनकी

सेवाओं के लिए उन्हें नागा हिल्स क्षेत्र में सेवा के लिए क्लैस्प सहित सैन्य सेवा

पदक मिला। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सेवा के लिए रक्षा पदक प्रदान किया

गया। जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सेवा के लिए भी उन्हें सैन्य सेवा पदक दिया गया। इसके

अतिरिक्त नौ वर्ष की उत्कृष्ट सेवा के लिए नौ वर्ष दीर्घ सेवा पदक, वर्ष 1971 के युद्ध

में योगदान के लिए संग्राम पदक तथा स्वतंत्रता के 25 वर्ष पूरे होने पर 25वीं स्वतंत्रता

वर्षगांठ पदक से सम्मानित किया गया।

सैनिक

जीवन में अनुशासन, साहस और समर्पण की मिसाल रहे सूबेदार दलेल सिंह का जाना क्षेत्र

और परिवार के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। ग्रामीणों ने उन्हें एक कर्मठ सैनिक

और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। शेर सिंह,

जिले सिंह, सुखबीर एडवोकेट, राम सिंह, सरपंच रेणू, रणधीर के पुत्र सतीश आइदि ने उनको

एक महान कर्मयौद्धा के रुप में याद किया।

हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना