हरियाणा में पराली जलाने से रोकने को बनेगा ‘पराली संरक्षण बल’

 

-खेतों में ड्रोन से रखी जाएगी नजर

चंडीगढ़, 24 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने धान की पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली संरक्षण बल’ गठित करने का निर्णय लिया है। यह बल पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी और रोकथाम के साथ-साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, देर शाम और रात के समय गश्त बढ़ाई जाएगी तथा खेतों में आग की घटनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर उपयोग के लिए किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने गुरुवार को चंडीगढ़ में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुपालन के संबंध में राज्य कार्य योजना की समीक्षा की।

कार्य योजना के तहत गठित ‘पराली संरक्षण बल’ में पुलिस कर्मियों के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, नोडल एवं क्लस्टर अधिकारियों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। यह बल जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्य करेगा तथा खेतों में आग लगने की घटनाओं की निगरानी करने के साथ-साथ पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने बताया कि देर शाम गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि कुछ किसानों द्वारा उपग्रहों की निगरानी से बचने के लिए अंधेरा होने के बाद पराली जलाने का प्रयास किया जाता है। ऐसे मामलों की प्रभावी रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और गश्त को और मजबूत किया जा रहा है।

कार्ययोजना के अनुसार, पराली जलाने की प्रत्येक सत्यापित घटना में तीन स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी, चालान किया जाएगा तथा किसान के भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की जाएगी।

इसके साथ ही निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि भी संबंधित उल्लंघनकर्ता से वसूल की जाएगी। सरकार द्वारा पराली जलाने के विकल्प उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

धान की कटाई के कार्यक्रम के अनुसार, बेलर, रेकर्स तथा अन्य फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी को विभिन्न जिलों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। सितंबर माह से यमुनानगर, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में धान की कटाई शुरू होती है, जबकि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद जैसे जिलों में कटाई का कार्य तेज होता है। अधिकारियों को पड़ोसी राज्यों तथा हरियाणा के आसपास के जिलों में मशीनरी के मालिकों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कटाई के समय आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

पराली प्रबंधन और खेत स्तर पर निगरानी के लिए 8,134 ग्राम स्तरीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। राज्य में लगभग 5,600 गांवों में 6,21,285 पंजीकृत धान उत्पादक किसान हैं, जिनके पास लगभग 34.1 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती है। अब तक 6,04,314 किसानों को नोडल अधिकारियों द्वारा कवर किया जा चुका है, जबकि 16,971 किसानों को अभी कवर किया जाना बाकी है।

निगरानी व्यवस्था के तहत सामान्य गांवों में एक नोडल अधिकारी को अधिकतम 100 किसानों तथा हॉटस्पॉट गांवों में अधिकतम 50 किसानों से जोड़ा जाएगा।

नोडल अधिकारी मोबाइल एप के माध्यम से खेतों में सक्रिय आग की लोकेशन की सूचना देंगे तथा यह भी दर्ज करेंगे कि संबंधित किसान फसल अवशेष का प्रबंधन खेत में ही करने, खेत से बाहर निकालकर करने या चारे के रूप में उपयोग करने जैसी विधियों से कर रहे हैं या नहीं। मोबाइल एप पर दर्ज सक्रिय आग की घटनाओं पर पराली संरक्षण बल द्वारा तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा