सोनीपत: हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही सच्ची जागृति: सतगुरु माता सुदीक्षा जी
सोनीपत, 26 अक्टूबर (हि.स.)। समालखा-
गन्नौर के मध्य हल्दाना बॉर्डर स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर देश-विदेश से
आए लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने 79वें
वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन कहा कि हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम
में स्थिर रहना ही सच्ची आध्यात्मिक जागृति है। उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियों
में आस्था बनाए रखना आसान होता है, लेकिन सच्ची भक्ति वही है जो विपरीत परिस्थितियों
में भी अडिग रहे।
माता
सुदीक्षा जी ने कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन और हर पल निराकार प्रभु का अनुभव
करना ही आध्यात्मिक जीवन का सार है। परमात्मा अटल सत्य है, जबकि मनुष्य की इच्छाएं
और परिस्थितियां बदलती रहती हैं। ब्रह्मज्ञान से प्राप्त जागृति व्यक्ति को जीवनभर
सजग और सचेत रहने की प्रेरणा देती है। इसका प्रभाव उसके व्यवहार, निर्णयों और सामाजिक
जीवन में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने
कहा कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होते समय व्यक्ति को अपने उद्देश्य पर भी विचार करना
चाहिए कि उसका प्रयास वास्तव में भलाई के लिए है या अहंकार, स्वार्थ और दिखावे के कारण।
विचारों में भिन्नता होने के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का अंश देखकर उसे
अपनाना ही निष्काम प्रेम की पहचान है।
सतगुरु
माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रवचनों से पहले निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि जीवन
में जहां बदलाव संभव हो, वहां सकारात्मक प्रयास करने चाहिए। वहीं, जहां बदलाव संभव
न हो, वहां परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने
कहा कि मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और संसार की जरूरतों के प्रति सजग रहता है, लेकिन
कई बार अपनी आत्मा की वास्तविक प्यास को भूल जाता है।
इस अवसर
पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु का आशीर्वाद लिया। कई पार्षदों
और विधायकों ने भी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज तथा निरंकारी राजपिता रमित जी के
दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। समागम में दिव्यांग संत-महात्माओं की सुविधा के लिए
सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गईं। उनके ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था
की गई। कार्यक्रम देखने के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गईं, ताकि वे सुविधापूर्वक समागम
में शामिल हो सकें और सतगुरु के दर्शन कर सकें।
मिशन
के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की ओर से समागम स्थल पर व्यापक चिकित्सा सुविधाएं
उपलब्ध कराई गईं। यहां आठ एलोपैथिक और छह होम्योपैथिक औषधालयों के साथ 15 प्राथमिक
चिकित्सा केंद्र बनाए गए। इसके अलावा कायरोप्रैक्टिक शिविर और 15 आईसीयू सुविधाओं सहित
120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल तैयार किया गया।
आपातकालीन
सेवाओं के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एंबुलेंस तैनात की गईं। इनमें 15
वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस शामिल थीं। कायरोप्रैक्टिक शिविर में भारत और विदेशों से आए
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सेवाएं दीं। आयोजकों के अनुसार, इस शिविर में हजारों लोगों
को उपचार से लाभ मिला। इसके अलावा नाक-कान-गला, नेत्र, बाल रोग, दंत चिकित्सा और मनोरोग
सहित विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने श्रद्धालुओं को चिकित्सा सेवाएं प्रदान
कीं।
समागम
स्थल पर चार स्थानों पर लंगर की व्यवस्था की गई, जहां श्रद्धालुओं को दिन-रात भोजन
उपलब्ध कराया गया। सभी को एक साथ बैठकर भोजन करते देख सेवा, समानता और वसुधैव कुटुम्बकम
की भावना दिखाई दी। इसके अलावा 22 कैंटीनों में रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी
और मिनरल वाटर उपलब्ध कराया गया। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं
को भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना