हिसार : हाईटेंशन लाइनों के मुआवजे पर भड़के किसान, दिया प्रदेशस्तरीय धरना

 




लॉटरी व्यवस्था वापस लेने की मांग, कड़े आंदोलन

की चेतावनी

हिसार, 28 जुलाई (हि.स.)। बिजली की हाईटेंशन लाइनों

के मुआवजे की मार्केट वैल्यू तय करने के लिए लागू की गई कथित ‘लॉटरी व्यवस्था’ के विरोध में मंगलवार को प्रदेशभर से पहुंचे किसानों ने यहां के विद्युत सदन

के बाहर प्रदेशस्तरीय धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी

करते हुए हाईटेंशन लाइनों के मुआवजे, लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन, पर्याप्त बिजली आपूर्ति

सहित विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के माध्यम से सरकार को मांगपत्र

सौंपा।

धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता अभिमन्यु

कोहाड़ ने कहा कि इससे पहले हांसी, पानीपत सहित कई जिलों में आंदोलन किए जा चुके हैं।

अब हिसार में प्रदेशस्तरीय धरना देकर सरकार को किसानों की समस्याओं से अवगत कराया गया

है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया

जाएगा।

किसान नेता हर्षदीप गिल ने बताया कि इस वर्ष

30 जनवरी को हरियाणा सरकार ने हाईटेंशन बिजली लाइनों के नीचे और आसपास की भूमि का मुआवजा

मार्केट वैल्यू के आधार पर 30, 45 और 60 प्रतिशत तक देने की व्यवस्था लागू की थी। इससे

किसानों को उम्मीद थी कि खंभों के नीचे आने वाली भूमि का 200 प्रतिशत तक तथा तारों

से प्रभावित क्षेत्र का उचित मुआवजा मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि 29 अप्रैल को जारी

नए नोटिफिकेशन के जरिए सरकार ने मार्केट वैल्यू तय करने की प्रक्रिया बदल दी और कथित

‘लॉटरी प्रणाली’ लागू कर दी। किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था पारदर्शी नहीं है और इससे

अधिकृत वैल्यूएटर द्वारा तय किए गए भूमि मूल्य का महत्व समाप्त हो जाएगा।

2026 का नोटिफिकेशन वापस लेने की मांग

धरने में किसानों ने मांग की कि इस वर्ष 29 अप्रैल

का नोटिफिकेशन तत्काल वापस लिया जाए तथा मार्केट वैल्यू निर्धारित करने की प्रक्रिया

में किसानों के अधिकृत वैल्यूएटर की रिपोर्ट को भी शामिल किया जाए। किसानों का कहना

है कि वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में

भी सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान है।

किसानों ने शहर की सीमा से 15 किलोमीटर तक के

गांवों को शहरी क्षेत्र मानते हुए हाईटेंशन लाइनों के नीचे और आसपास की भूमि का 60

प्रतिशत मुआवजा देने की मांग की। इसके अलावा लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन तुरंत जारी करने,

बोर खराब होने पर ट्यूबवेल शिफ्टिंग के नाम पर कथित अवैध वसूली बंद करने, खरीफ सीजन

के दौरान किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने तथा गांवों में बिजली

कर्मचारियों की पर्याप्त नियुक्ति की मांग भी उठाई।

किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने किसानों

की जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशभर में और

तेज किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की शीघ्र मुलाकात का समय देने

की मांग भी की, ताकि किसान अपने पक्ष को तथ्यों और तर्कों के साथ सरकार के समक्ष रख

सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर