हिसार : कृषि में नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हकृवि लगातार प्रयासरत : प्रो. बीआर कम्बोज

 


हकृवि के एबिक ने चार स्टार्टअप्स के साथ किए

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

हिसार, 22 फरवरी (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय

में स्थापित एग्री बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में

नवाचार, उद्यमिता और व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए चार स्टार्टअप्स के साथ एमओए किए

गए हैं। एबिक द्वारा कृषि मंत्रालय के माध्यम से चार चयनित स्टार्टअप्स को 62 लाख रूपए

की अनुदान राशि भी स्वीकृत की गई है।

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने रविवार काे बताया कि हकृवि

कृषि में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया

कि एबिक इनोवेशन आधारित एग्री स्टार्टअप्स के लिए ऐसा प्लेटफार्म हैं जहां कृषि या

कृषि से संबंधित क्षेत्र के स्टार्टअप, छोटे उद्यमी, किसान तथा महिला उद्यमी अपने कृषि

व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं। इस केन्द्र के द्वारा नव उद्यमियों को आवश्यक तकनीकी,

वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और नेटवकिंग सेवाएं प्रदान की जाती है जिससे वे अपनी कृषि

व्यवसाय को सफलतापूर्वक बाजार में उतार सकें और अपने क्षेत्र में स्वरोजगार एवं रोजगार

सृजन कर सकें। कुलपति ने बताया कि कृषि अब पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि

यह नवाचार मूल्य संवर्धन और तकनीकी उन्नयन का आधुनिक क्षेत्र बन चुकी है। यदि हमारे

युवा उद्यमिता की भावना के साथ आगे बढ़ते रहे तो वह रोजगार लेने वाले नहीं बल्कि रोजगार

देने वाले बनेंगे। उन्होंने बताया कि एबिक के माध्यम से अब तक हुए कुल 7 कोहार्टस में

77 स्टार्टअप्स को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा लगभग 10 करोड

रुपए की ग्रांट स्वीकृत की जा चुकी है जिनमें से कई स्टार्टअप सफलतापूर्वक आत्मनिर्भर

उद्यम के रूप में स्थापित हो चुके हैं।

आरकेवीवाई रफ्तार स्कीम के नियंत्रक अधिकारी

एवं हकृवि के अनुसंधान निदेशक डॉ राजबीर गर्ग ने बताया कि विश्वविद्यालय अब केवल शिक्षण,

अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नवाचार आधारित उद्यमिता

को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया

कि एबिक द्वारा युवाओं/विद्यार्थियों को अपने नए आइडिया के साथ व्यवसाय शुरू करने एवं

आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर कोहार्ट में छात्र कल्याण प्रोग्राम, पहल और सफल कार्यक्रम

शुरू किए गए हैं। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत युवाओं को प्रशिक्षण और चार से 25 लाख

रुपए तक की अनुदान राशि देने का प्रावधान किया गया है।

एबिक के निदेशक डॉ. राजेश गेरा ने बताया कि जिन

चार स्टार्टअप्स के साथ एमओए किए गए है उनमें

महेंद्रगढ निवासी योगेंद्र कुमार की कंपनी वाईएमडब्ल्यू फूड प्राइवेट लिमिटेट

को 12 लाख रुपए, यह स्टार्टअप मशरूम के मूल्य संवर्धन पर कार्य कर रहा है, जिसके अंतर्गत

मशरूम-कोटेड स्नैक्स, मशरूम पाउडर तथा मशरूम आधारित नमकीन एवं मिठाई जैसे उत्पाद विकसित

कर रहा है और साथ ही किसानों को भी प्रशिक्षण देकर उनकों भी उद्यमिता की तरफ अग्रसर

कर रहा है। पानीपत निवासी रामावतार की कंपनी

आस एग्रो को 25 लाख रुपए, इस स्टार्टअप ने मशरूम उत्पादन एवं अन्य कृषि कार्यों के

लिए कंपोस्ट तैयार करने के लिए डीजल इंजन संचालित चार-पहिया मशीन विकसित की है। यह

मशीन श्रम लागत को कम करने तथा कंपोस्ट निर्माण की दक्षता बढ़ाने में सहायक है। हिसार

के प्रदीप की कंपी ओरिक इंनीशिएटिव, हिसार एलएलपी को 20 लाख रुपए, यह स्टार्टअप केले

की वैल्यू चेन में होने वाली फसलोपरांत (पोस्ट-हार्वेस्ट) हानियों को कम करने के लिए

नियंत्रित परिस्थितियों में प्राकृतिक पकने की प्रक्रिया का अनुकरण करता है। यह तकनीक

समान रूप से पकाव सुनिश्चित करती है, शेल्फ लाइफ बढ़ाती है तथा किसानों को बेहतर बाजार

मूल्य प्राप्त करने में सहायता करती है। पंचकुला की दिब्बा व विनीत कुमार की कंपनी

पर्वा इम्यूनोकेयर प्राइवेट लिमिटेड को पांच लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस

स्टार्टअप ने जीवित प्रोबायोटिक फॉर्मुलेशन विकसित किए हैं, जिनमें अनाज एवं बेरी आधारित

प्रोबायोटिक पेय शामिल हैं जो पाचन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में सहायक हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर