नूंह: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगीना में पेयजल का संकट,मरीज व तीमारदार परेशान
नूंह, 23 जुलाई (हि.स.)। नगीना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरी में लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है या फिर बाजार से बोतलबंद पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
नगीना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत लगभग 44 गांवों के लोग उपचार के लिए आते हैं। इतने बड़े क्षेत्र की आबादी को सेवाएं देने वाले इस अस्पताल में स्वच्छ पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। जब तक अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की योजनाएं अधूरी ही रहेंगी।अस्पताल परिसर में बने पानी के कुंड (वाटर टैंक) का ढक्कन लंबे समय से टूटा हुआ है। इसके कारण धूल-मिट्टी, कचरा और अन्य गंदगी सीधे पानी में पहुंच रही है। साथ ही कीट-पतंगों के प्रवेश से पानी दूषित और संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में यह पानी पीने योग्य नहीं रह गया है, लेकिन विकल्प के अभाव में मरीज और उनके तीमारदार इसी पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं।वर्षा ऋतु में जलजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे समय में अस्पताल में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था न होना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। जिस अस्पताल में लोग स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं यदि उन्हें दूषित पानी पीना पड़े तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।सर्व जातीय सेवा समिति के उपाध्यक्ष रजत जैन ने बताया कि अस्पताल परिसर में लगा वाटर कूलर और आरओ सिस्टम भी लंबे समय से खराब पड़ा है। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से खराब वाटर कूलर और आरओ की तत्काल मरम्मत कराने तथा अस्पताल में स्थायी रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में यदि मूलभूत सुविधाएं ही बदहाल रहेंगी तो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे खोखले साबित होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया