स्वयं सहायता समूहों को डेयर फार्मिंग के लिए मिलेंगी शामलात जमीनें

 

-मंत्रिमंडल की बैठक में जमीन पट्टे पर देने को मंजूरी

चंडीगढ़, 18 मई (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में विकास एवं पंचायत विभाग के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को डेयरी फार्मिंग के उद्देश्य से 'शामलात देह' (सामुदायिक) भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

कैबिनेट ने 'हरियाणा ग्राम सांझी भूमि (विनियमन) नियम, 1964' के नियम 6 में संशोधन को संबंधित नियमों और शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है। संशोधित प्रावधानों के बाद, ग्राम पंचायतों को हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों और स्वयं सहायता समूहों की सहकारी समितियों को डेयरी स्थापित करने के लिए 500 वर्ग गज तक की 'शामलात देह' भूमि पट्टे पर देने की अनुमति होगी। यह पट्टा शुरू में पांच साल की अवधि के लिए दिया जाएगा, और डेयरी के संतोषजनक संचालन के आधार पर (जैसा कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा प्रमाणित किया जाएगा), इसे और तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

इस नीति को स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि वे डेयरी इकाइयों का सफलतापूर्वक संचालन करने के बाद अंतत: स्वतंत्र रूप से अपनी भूमि खरीद सकें।

संशोधित नीति में आगे यह भी निर्धारित किया गया है कि स्वयं सहायता समूहों के सदस्य उसी गाँव या ग्राम पंचायत के निवासी होने चाहिए। इसके अलावा, कोई भी स्वयं सहायता समूह भूमि आवंटन के लिए तब तक पात्र नहीं होगा, जब तक कि उसके किसी सदस्य या उनके परिवार के सदस्यों के पास 500 वर्ग गज या उससे अधिक की अपनी निजी भूमि न हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा