हिसार : अब पशुओं में बार-बार गर्भाधान की समस्या का मिलेगा वैज्ञानिक समाधान
लुवास वैज्ञानिकों की ‘सहायक पंजिका’ को भारत सरकार का कॉपीराइट
दुधारू पशुओं में गर्भधारण की सफलता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया स्टेप-बाय-स्टेप
डिसीजन ट्री
पशुपालकों, पशु चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए बनेगी व्यवहारिक मार्गदर्शिका
हिसार, 27 जुलाई (हि.स.)। दुधारू पशुओं में बार-बार गर्भाधान के बावजूद गर्भधारण
नहीं होना और समय पर हीट (गर्मी) में न आना जैसी समस्याओं से जूझ रहे पशुपालकों के
लिए राहत भरी खबर है। इन जटिल प्रजनन समस्याओं का वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक समाधान उपलब्ध
कराने के उद्देश्य से यहां के लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय
(लुवास), के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ‘पशुओं में सफल गर्भधारण के लिए सहायक पंजिका’ को भारत सरकार ने आधिकारिक
कॉपीराइट प्रदान किया है।
यह उपलब्धि न केवल लुवास बल्कि देश में पशु प्रजनन अनुसंधान
एवं डेयरी विकास के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। देश में डेयरी क्षेत्र के तेजी से विस्तार के बीच लुवास की यह उपलब्धि पशुपालन
अनुसंधान को नई पहचान देने के साथ-साथ किसानों के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को
व्यवहारिक रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह कॉपीराइट हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र, महेंद्रगढ़ के वैज्ञानिक डॉ. दविंदर
सिंह, डॉ. ज्योति शुन्थ्वल, डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय और डॉ. सुजॉय खन्ना को संयुक्त
रूप से प्रदान किया गया है। कॉपीराइट मिलने के बाद वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय के
कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें इस उपलब्धि की जानकारी
दी। इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. सुशीला मान एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दिनेश मित्तल
भी उपस्थित रहे।
कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा
कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित शोध एवं तकनीकों को सीधे पशुपालकों
तक पहुंचाना है, ताकि उनकी आय बढ़े और डेयरी व्यवसाय अधिक लाभकारी बन सके। उन्होंने
कहा कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह सहायक पंजिका पशुपालन
क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और आधुनिक प्रबंधन को बढ़ावा देगी। उन्होंने विश्वास जताया
कि भविष्य में भी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इसी प्रकार किसान हितैषी नवाचारों से
देश के पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देते रहेंगे।
वैज्ञानिक निर्णय लेने में करेगी मदद
यह सहायक पंजिका स्टेप-बाय-स्टेप डिसीजन ट्री के रूप में विकसित की गई है,
जिससे पशुपालक, पशु चिकित्सक और विद्यार्थी पशु की स्वास्थ्य स्थिति, प्रजनन इतिहास,
लक्षणों एवं स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर सही निर्णय तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
इसमें दुधारू पशुओं में समय पर हीट न आना, बार-बार गर्भाधान के बाद भी गर्भधारण न होना,
साइलेंट हीट, कृत्रिम गर्भाधान (एआई) का सही समय, असामान्य प्रजनन स्राव की पहचान एवं
उपचार, संतुलित पोषण, मिनरल सप्लीमेंटेशन तथा वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी विस्तृत एवं
व्यावहारिक जानकारी दी गई है।
आर्थिक नुकसान कम करने में भी होगी कारगर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैज्ञानिक पंजिका गर्भाधान की सफलता दर बढ़ाने,
प्रजनन दक्षता में सुधार लाने तथा बांझपन और असफल गर्भाधान के कारण होने वाले आर्थिक
नुकसान को कम करने में प्रभावी साबित होगी। इससे डेयरी पशुपालन की उत्पादकता बढ़ेगी
और पशुपालकों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर