रेवाड़ी पहुंचीं कर्नाटक की राज्यपाल सुधा यादव, बेटे सिद्धार्थ के लिए मांगा जनसहयोग
रेवाड़ी, 01 नवंबर (हि.स.)। कर्नाटक की राज्यपाल बनने के बाद रविवार को पहली बार अपने गृह जिले रेवाड़ी पहुंचीं डॉ. सुधा यादव ने लोगों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि पिछले 27 वर्षों से जिस तरह लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को संभाला है, उसी तरह अब उनके बेटे सिद्धार्थ को भी अपना साथ और सहयोग दें। उसकी ताकत बनें, मार्गदर्शन करें और गलती होने पर उसे समझाकर सही रास्ता दिखाएं।
गांव धामलावास में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि रेवाड़ी के लोगों का स्नेह और सहयोग जीवन के हर उतार-चढ़ाव में उनके साथ रहा है। परिस्थितियां कैसी भी रही हों, यहां के लोगों ने उन्हें कभी निराश नहीं होने दिया। अब उनकी जिम्मेदारी बदल गई है और उन्हें कर्नाटक में काम करना है, लेकिन इस माटी से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहेगा। उन्होंने बताया कि 26 मई 1999 को एक अध्यापिका और लेक्चरर के रूप में जीवन की शुरुआत की थी। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि आगे क्या घटनाक्रम होंगे। वरिष्ठजनों के आशीर्वाद और लोगों के सहयोग से उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिला।
राज्यपाल ने कहा कि कर्नाटक के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी मिलने की सूचना उनके लिए अप्रत्याशित थी। वह इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थीं। राष्ट्रपति द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी पूरे परिवार के लिए सुखद पल रही। उन्होंने राष्ट्रपति का आभार जताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से निभाने के लिए मार्गदर्शन लिया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कर्नाटक के 32 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बातचीत की जा रही है। अब तक 20 कुलपतियों से मुलाकात हो चुकी है। विश्वविद्यालयों के लिए रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू है। इसके लिए 15 दिन का समय लिया गया है। रोडमैप तैयार होने के बाद इसकी जानकारी साझा की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला