हिसार : महाप्रबंधक की मनमानी व कर्मचारियों के लाभ अटकाने के खिलाफ मुखर हुए रोडवेज कर्मचारी

 


रोडवेज प्रांगण में विशाल गेट मीटिंग करके शुरू

किया अनिश्चितकालीन धरना

15 सूत्रीय मांगपत्र पर कार्रवाई नहीं होने से

कर्मचारियों में रोष, सैकड़ों कर्मचारियों ने जताया विरोध

हिसार, 22 सितंबर (हि.स.)। रोडवेज महाप्रबंधक

की मनमानी व पिछले लगभग पांच माह से लंबित मांग पत्र पर कोई कार्रवाई न किए जाने से

खफा रोडवेज कर्मचारी मंगलवार को मुखर हो गए। उन्होंने डिपो प्रांगण में गेट मीटिंग

करके मांगों व समस्याओं का समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। गेट

मीटिंग में विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों समेत सैकड़ों कर्मचारियों ने भाग लिया।

गेट मीटिंग में वक्ताओं ने कहा कि इस साल 29 अप्रैल

को हिसार डिपो की सभी यूनियनों ने एकजुट होकर सांझा संघर्ष समिति का गठन किया था और

15 सूत्रीय मांगपत्र महाप्रबंधक को सौंपा था। काफी समय बीतने के बावजूद एक-दो मांगों

को छोड़कर अधिकांश समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। कर्मचारियों के अनुसार एलटीसी,

मेडिकल बिल, शिक्षा भत्ता, रात्रि भत्ता और एसीपी सहित कई कर्मचारी लाभ लंबे समय से

लंबित हैं, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गेट मीटिंग में महाप्रबंधक की कार्यप्रणाली और

कर्मचारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी रोष जताया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि

कार्यालय में फाइलों के निपटारे में देरी के कारण उनके लाभ संबंधी मामले लंबित हैं।

उन्होंने इन आरोपों की विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। उन्होंने

यह भी आरोप लगाया कि एक तो मांगों व समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा, वहीं दूसरी

तरफ महाप्रबंधक यह भ्रम फैलाकर गुमराह कर रहे हैं कि अधिकतर मांगों व समस्याओं का समाधान

कर दिया गया है। वक्ताओें नेे कहा कि यदि महाप्रबंधक अपनी बात पर कायम है तो वे कर्मचारियों

के सामने मंच पर आकर बताए कि कौन सी मांग पूरी हुई है।

इस दौरान संदीप जैनावास, कर्मबीर मसूदपुर, अनूप

श्योकद, बजरंग लाखा, जोगेंद्र पंघाल, अरुण शर्मा, जितेंद्र शर्मा, नरेंद्र खरड़, अमित

जुगलान और पवन कनोह सहित अनेक कर्मचारी नेता मौजूद रहे। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक

मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। उन्होंने सरकार

और परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित समस्याओं का समाधान

करवाने की मांग की।

हालांकि धरना शुरू होने के बाद भी महाप्रबंधक

ने सांझा संघर्ष समिति को बातचीत के लिए बुलाया और एक माह का समय और मांगा, जिस पर

समिति ने सहमति देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि पहले भी पांच माह का समय दिया जा

चुका है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर