हिसार : साहित्यकार जयभगवान सैनी की पुस्तक ‘म्हारे पक्षी’ का विमोचन
समाज को सही मार्ग दिखाने में साहित्य की रही महत्वपूर्ण भूमिका : जयभगवान
सैनी
हिसार, 03 अगस्त (हि.स.)। वरिष्ठ साहित्यकार जयभगवान सैनी की नव प्रकाशित पुस्तक
म्हारे पक्षी का विमोचन पूरे उत्साह के साथ किया गया। शहर के गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय
सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर
पर हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मदेवी विद्यार्थी ने कार्यक्रम
की अध्यक्षता की और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधुकांत मुख्यातिथि रहे। साहित्यकार डॉ.
ओमप्रकाश कादयान, राममप्रकाश खटकड़, डॉ. मनोज भारत व डॉ. महेंद्र विशिष्ट अतिथि मौजूद
रहे। इस दौरान कैथल के कवि राजेश भारती को हंस कविता पुरस्कार से सम्मानित भी किया
गया। इस अवसर पर साहित्य, कला व विचारों के माध्यम से समाज को प्रेरित करने एवं उत्कृष्ट
व प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए जयभगवान सैनी को पटका पहनाकर सम्मानित भी किया गया।
पुस्तक के विमोचन के उपरांत जयभगवान सैनी ने बताया कि उनके द्वारा रचित 45
पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि समाज को सही मार्ग दिखाने में साहित्य
की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि लेकिन आज की युवा पीढ़ी
पुस्तकों से विमुख होती जा रही है। जयभगवान सैनी ने आह्वान किया कि युवाओं को आधुनिक
गैजेट्स इस्तेमाल करने के साथ-साथ अपनी रुचि अनुसार पुस्तकों का पठन-पाठन भी करना चाहिए। जयभगवान सैनी ने साेमवार काे बताया कि उनके द्वारा लिखित श्री अमरनाथ धाम एवं गंगा मैया,
डगर-डगर नगर-नगर, रास्तों में रास्ते, वे सुनहरे पल व चलें धामों की ओर यात्रा संस्मरण
काफी पसंद किए गए हैं। इसी भांति कविता संग्रह उम्मीदें, फलों का फल, सब्जीनामा, धरोहर
की पाती व धरती मां (हरियाणवी अनुवादित) कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
लघुकविता
संग्रह लुप्त-विलुप्त (हरियाणवी), मन की गंगोत्री, स्मृति शेष : जयलालदास, प्रो. रूप
देवगुण : अतीत की झलकियां, अतीत के झरोखे, एक बै अमराई मैं (हरियाणवी अनुवादित), दिवस
में दिवस, मैंने पूछा, अन्न पै अधिकार सभी का (हरियाणवी अनुवादित) व विभूतियों की महिमा
भी पाठकों ने सराहे हैं। आत्मकथा उमड़ती हरियाणवी यादें, बाल साहित्य कलरव करते पक्षी,
पक्षियों का संसार व चुन्नू-मुन्नू की रचना भी वे कर चुके हैं। घटना-दुर्घटना कहानी
संग्रह भी वे लिख चुके हैं। सैनिक जीवन : एक संघर्ष गाथा पुस्तक को काफी पसंद किया
गया है। जयभगवान सैनी बताया कि हाल ही में रोहतक के बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय द्वारा
शोध के लिए साहित्य स्वीकृत किए जाने से उनका हौसला बढ़ा है। उनके साहित्य पर शोध किया
जाएगा और विद्यार्थियों को उनके साहित्य को समझने का मौका मिलेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर