हिसार जेल से लगभग साढ़े 11 साल बाद बाहर निकला रामपाल

 






हाईकोटे से दो दिन पहले मिली थी रामपाल को जमानत

रिहाई के समय सतर्क रही पुलिस व अन्य सुरक्षा

एजेंसियां

हिसार, 10 अप्रैल (हि.स.)। बरवाला क्षेत्र के

सतलोक आश्रम प्रकरण में उम्र कैद की सजा काट रहे रामपाल को शुक्रवार को जिला की सेंट्रल

जेल-2 से रिहा किया गया। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायाल से दो दिन पूर्व जमानत मिलने

के बाद रामपाल की रिहाई हुई है। रामपाल की रिहाई 11 साल चार महीने व 24 दिन बाद हुई

है। परिवार के लोग रामपाल को लेने के लिए जेल में पहुंचे। रामपल की रिहाई के समय उनके

समर्थकों के पहुंचने की आशंका के चलते पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसिया सक्रिय रही। पुलिस

ने नाके लगाकर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखा।

राजगढ़ रोड स्थित सेंट्रल जेल-2 से रामपाल दोपहर

को रिहा हुआ और सफेद पर्दे लगी फॉर्च्यूनर गाड़ी में बैठकर निकल गया। बताया गया है

कि रिहाई के बाद रामपाल हिसार से सीधा सोनीपत जिले के गोहाना में स्थित धनाना के सतलोक

आश्रम के लिए रवाना हुआ। उसके काफिले में डिफेंडर, फॉर्च्यूनर जैसी 20 गाड़ियां हैं।

हरियाणा पुलिस की एक गाड़ी काफिले को एस्कॉर्ट कर रही है। धनाना गांव में रामपाल के

समर्थक जुटे हुए हैं और वे गांव से एक किलोमीटर पहले ही रामपाल का स्वागत करेंगे।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दो दिन पूर्व

8 अप्रैल को उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल की जमानत मंजूर की थी। शुक्रवार सुबह ही

कोर्ट के आदेश पर रामपाल के वकीलों ने हत्या के दो मामलों में पांच-पांच लाख के बेल

बॉन्ड जमा करवाए। रामपाल के जेल से बाहर निकलने से पहले उसकी दो महिला भक्त पहुंचीं।

दोनों ने गेट के सामने दंडवत होकर प्रणाम किया।

पुलिस व समर्थकों में 2014 में हुआ था टकराव

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नवंबर 2014 में

रामपाल को एक केस में कोर्ट की अवमानना के एक मामले में पेश होने का आदेश दिया था,

लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसी के चलते 19 नवंबर 2014 को पुलिस रामपाल को गिरफ्तार करने

हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पहुंची। यहां पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच

टकराव हुआ। इस दौरान महिलाओं और बच्चों समेत 6 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद रामपाल

को गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 2018 में हिसार कोर्ट ने रामपाल को दोषी ठहराया और हत्या

सहित अन्य धाराओं में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले में रामपाल पर देशद्रोह का

केस भी दर्ज किया गया था।

इस तरह साफ हुआ जेल से रिहाई का रास्ता

सतलोक आश्रम मामले में आश्रम के मुखिया रामपाल

को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से 8 अप्रैल को बड़ी राहत मिली। लगभग 11 साल, 4 महीने

और 22 दिन जेल में रहने के बाद कोर्ट ने रामपाल को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील और रामपाल के वकील के बीच ज़ोरदार बहस हुई। सरकारी वकील

ने रामपाल को जमानत देने का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि रामपाल पर बहुत

गंभीर आरोप हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने अपने समर्थकों को इकट्ठा किया,

जिन्होंने पुलिस पर पत्थर फेंके, गोलियां चलाईं और पेट्रोल बम भी फेंके। इससे कई पुलिस

वाले घायल हो गए। इसलिए, रामपाल को जमानत देना ठीक नहीं होगा। रामपाल के वकील ने कहा

कि रामपाल 11 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। इस मामले में 900 से ज्यादा लोग आरोपी

हैं, जिनमें से ज्यादातर को जमानत मिल चुकी है। कुल 425 गवाह हैं, लेकिन अब तक सिर्फ

58 गवाहों की गवाही हो पाई है। ट्रायल जल्दी पूरा होने की उम्मीद नहीं है। वकील ने

रामपाल की उम्र लगभग 78 साल बताते हुए, उनकी सेहत और मानवीय आधार पर भी जमानत देने

की मांग की। दोनों तरफ के वकीलों की बातें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर विचार

किया और कहा कि रामपाल लंबे समय से जेल में है और ट्रायल बहुत धीरे चल रहा है। कोर्ट

ने यह भी माना कि बाकी आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इन सब बातों को देखते

हुए, कोर्ट ने कहा कि यह मामला जमानत देने लायक है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा

कि रामपाल को नियमित जमानत पर रिहा किया जाए, लेकिन कुछ कड़ी शर्तें भी लगाईं। रामपाल

भविष्य में किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा नहीं करेगा और न ही ऐसी किसी गतिविधि में शामिल

होगा। अगर रामपाल जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो राज्य सरकार उसकी जमानत रद्द

करवा सकती है।

जमानत की शर्तें पढ़कर सुनाई : जेल अधीक्षक

हिसार सेंट्रल जेल-2 के सुपरिंटेंडेंट रमेश कुमार

ने बताया कि जमानत के दौरान एक एक पेपर का मिलान किया और हाईकोर्ट की शर्तों को पढ़कर

सुनाया गया। इसके बाद माननीय अदालत के निर्देश पर रामपाल को रिहा किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर