हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने चार विधायकों को नोटिस जारी किया
-क्रॉस वोटिंग पर सदस्यता खतरे में नहीं—एंटी-डिफेक्शन कानून लागू नहीं होता : एडवोकेट हेमंत कुमार
चंडीगढ़, 19 मार्च (हि.स.)। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट मिलने के बावजूद क्रॉस वोटिंग का घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस ने चार विधायकों को नोटिस जारी किया है। पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया कि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो निष्कासन तक की कार्रवाई हो सकती है।हरियाणा विधानसभा में 37 विधायकों वाली कांग्रेस अपने ही उम्मीदवार को पूरी ताकत नहीं दिला सकी। मतगणना के बाद सामने आया कि कांग्रेस के पांच विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर वोटिंग की, जबकि चार विधायकों के वोट तकनीकी कारणों से रद्द हो गए। इस चुनाव के दो दिन बाद ही कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाते हुए चार विधायकों - शैली चौधरी, मोहम्मद इलियास, मोहम्मद इसराइल और रेनु बाला के नाम सार्वजनिक कर दिए। पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने साफ कर दिया कि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो निष्कासन तक की कार्रवाई हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों की सदस्यता जा सकती है। संवैधानिक मामलों के जानकार तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार, राज्यसभा चुनाव विधानसभा की ‘आंतरिक कार्यवाही’ नहीं माने जाते। इसलिए यहां दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) सीधे लागू नहीं होता। यानी विधायक अपनी मर्जी से वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं, चाहे वह पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ ही क्यों न हो।
आमतौर पर विधानसभा या लोकसभा में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर सदस्यता जा सकती है, लेकिन राज्यसभा चुनाव अलग प्रकृति का होता है। यहां कोई भी पार्टी अपने विधायकों को कानूनी रूप से बाध्य नहीं कर सकती कि वे किसे वोट दें। यही वजह है कि क्रॉस वोटिंग के बावजूद विधायकों की सदस्यता सुरक्षित रहती है। हालांकि, राजनीतिक पार्टियां मौखिक निर्देश जरूर देती हैं और इसी के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है।
विधानसभा में व्हिप तोडऩे पर जा सकती है कुर्सी
अगर यही विधायक भविष्य में विधानसभा के अंदर किसी मुद्दे पर पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हैं। जैसे गलत वोटिंग या अनुपस्थित रहना, तो उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में विधानसभा स्पीकर के पास उनकी सदस्यता खत्म करने का अधिकार होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा