हरियाणा में नई संपत्ति कर नीति को मंजूरी, महिलाओं, सैनिकों और लाल डोरा क्षेत्र को मिलेगी विशेष छूट

 

चंडीगढ़, 28 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने राज्य के नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं की सीमा के भीतर स्थित भवनों एवं भूमि पर संपत्ति कर लगाने के लिए नई नीति को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। नई नीति के लागू होने के बाद वर्ष 2013 की संपत्ति कर संबंधी अधिसूचनाओं का स्थान नई व्यवस्था लेगी और राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में संपत्ति कर निर्धारण के लिए एक समान एवं सूत्र-आधारित प्रणाली लागू होगी।

बैठक में बताया गया कि नई व्यवस्था हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत नगर निगमों तथा हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के तहत नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के लिए अलग-अलग अधिसूचित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य संपत्ति कर निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और विवादरहित बनाना है।

नई प्रणाली के तहत विवेकाधीन एवं जटिल मूल्यांकन व्यवस्था को समाप्त कर पूंजीगत मूल्य के आधार पर कर निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए प्लॉट क्षेत्र अथवा कारपेट क्षेत्र, संबंधित क्षेत्र की कलेक्टर दर तथा फ्लोर फैक्टर को आधार बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे संपत्ति कर निर्धारण में पारदर्शिता आएगी और करदाताओं को पहले से ही अपनी कर देयता का अनुमान लगाने में सुविधा होगी।

नई नीति के तहत शहरों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। नगर निगमों को ए-1 और ए-2, जबकि नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं को बी और सी श्रेणी में रखा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए न्यूनतम और अधिकतम कर दरें निर्धारित की गई हैं। इससे स्थानीय निकाय अपनी आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित सीमा के भीतर कर दर तय कर सकेंगे, जबकि करदाताओं के लिए व्यवस्था अधिक पूर्वानुमेय और पारदर्शी होगी।

सरकार ने संपत्ति के उपयोग के आधार पर भी कर निर्धारण का प्रावधान किया है। नई प्रणाली में आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत और विशेष श्रेणी की संपत्तियों के लिए अलग-अलग उपयोग-आधारित गुणांक लागू होंगे। इसके अलावा, नई व्यवस्था लागू होने के बाद करदाताओं पर अचानक अधिक कर का बोझ न पड़े, इसके लिए कर वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

इन संपत्तियों को मिलेगी 100 प्रतिशत छूट

नई नीति के तहत निम्नलिखित श्रेणियों की संपत्तियों को पूर्ण संपत्ति कर छूट प्रदान की जाएगी। * जनता को निःशुल्क सेवाएं देने वाले मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च सहित धार्मिक स्थल।* पट्टे या किराये पर न दी गई नगरपालिका की संपत्तियां।* अनाथालय, वृद्धाश्रम, श्मशान घाट, कब्रिस्तान एवं धर्मशालाएं।* सरकारी शैक्षणिक संस्थान एवं सरकारी अस्पताल।* केवल कृषि कार्य के लिए उपयोग में लाई जाने वाली संपत्तियां।* सभी गौशालाएं (दूध, डेयरी उत्पाद, जैविक उर्वरक, बायो-सीएनजी, बायोगैस, गोबर एवं गोमूत्र की बिक्री से जुड़े हिस्से को छोड़कर)।* सेवारत एवं भूतपूर्व सैनिकों, अर्धसैनिक बलों के कर्मियों तथा शहीद सैनिकों के परिवारों के 250 वर्ग मीटर तक के स्व-अधिवासित आवास।* स्वतंत्रता सेनानियों, उनके जीवनसाथियों तथा युद्ध विधवाओं के स्व-अधिवासित मकान।* धर्मार्थ शैक्षणिक संस्थान, धर्मार्थ अस्पताल तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के विद्यालय।* नगरपालिका सीमा में नए शामिल हुए गांवों के लाल डोरा क्षेत्र की आवासीय संपत्तियां (अधिकतम तीन मंजिल तक) सम्मिलन की तिथि से पांच वर्ष तक।* निःशुल्क अथवा अवैतनिक पार्किंग इकाइयां।

करदाताओं के लिए अतिरिक्त रियायतें भी दी जाएंगी। नगरपालिका सीमा में स्थित मौजूदा गांवों के लाल डोरा क्षेत्र की आवासीय संपत्तियों को संपत्ति कर में 75 प्रतिशत छूट मिलेगी। एक संपत्ति पर अधिकतम 25 प्रतिशत तक संयुक्त छूट का लाभ दिया जाएगा। चालू आकलन वर्ष में 30 अप्रैल तक सभी बकाया सहित कर जमा करने पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि लगातार तीन वर्षों तक समय पर संपत्ति कर जमा करने वाले करदाताओं को अतिरिक्त 5 प्रतिशत की रियायत प्रदान की जाएगी।

इसके अलावा महिलाओं के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 25 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। संयुक्त स्वामित्व की स्थिति में यह छूट स्वामित्व के अनुपात में लागू होगी। 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं, पूर्ण रूप से कार्यरत शून्य-अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली अपनाने वाली ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों एवं प्रॉपर्टी क्लस्टरों को भी 10 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी।

राज्य सरकार का कहना है कि नई संपत्ति कर नीति का उद्देश्य कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और न्यायसंगत बनाना है। इसके साथ ही सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण वर्गों को राहत देना, समय पर कर भुगतान को प्रोत्साहित करना तथा शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना इस नीति का प्रमुख लक्ष्य है।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा