स्थाई मान्यता वाले स्कूलों का दस साल बाद रिव्यू करवाने का विरोध

 

प्राइवेट स्कूल संघ ने सरकार के फैसले के खिलाफ खोला मोर्चा

चंडीगढ़, 25 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा सरकार द्वारा स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों की मान्यता का दस साल बाद दोबारा रिव्यू करवाने के आदेशों का प्राइवेट स्कूल संघ ने विरोध किया है। संघ ने इन आदेशों को वापस लेने की मांग की है। हरियाणा सरकार ने बीती 30 सिंतबर तक निजी स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों की मान्यता का रिव्यू करवाने के आदेश जारी किए हैं।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों की गतिविधियों एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा पहले से ही विभिन्न माध्यमों से लगातार होती रहती है। शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूलों से फॉर्म-6 भरवाया जाता है तथा यूडाईज के माध्यम से भी स्कूल की आधारभूत सरंचना, विद्यार्थियो, शिक्षकों और अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी दी जाती है। इसके अलावा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा भी स्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों से प्रतिवर्ष दो हज़ार शुल्क पल्स जीएसटी के साथ निरंतरता फॉर्म भी भरवाया जाता है, जिसमे स्कूल की सारी जानकारी भरी जाती है।

इसी के माध्यम से स्कूल की मान्यता की समीक्षा ही होती है। ऐसे में अलग से 10 वर्ष बाद रिव्यू की अनिवार्यता गलत है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग को इन स्कूलों की मान्यता से संबंधित जानकारी या दस्तावेजों की पुष्टि ही करनी है तो संबंधित स्कूल से शपथ पत्र लेकर भी समीक्षा की जा सकती है।

कुंडू ने कहा कि आरटीई नियम-2011 के अपेंडिकस एक में निर्धारित मानको के अनुसार तो एक कमरा-एक कक्षा के हिसाब से स्कूलों को मान्यता देने का प्रावधान भी मौजूद है। यदि विभाग स्कूलों की मान्यता समीक्षा को इतना सख्ती से लागू करना चाहता हे तो फिर स्कूलों को इस नियम के तहत एक कमरा-एक कक्षा के अनुसार मान्यता भी मिलनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा