हिसार रोडवेज डिपो में अनिश्चितकालीन चक्का जाम, दूसरे डिपुओं और निजी बसों ने संभाली परिवहन व्यवस्था

 




सुबह 4 बजे से कर्मचारियों ने मुख्य गेट पर डाला

डेरा, डिपो की बसों का संचालन पूरी तरह बंद

दूसरे डिपुओं की बसें और निजी बसें निर्धारित

समय पर चलती रहीं, यात्रियों को नहीं हुई ज्यादा परेशानी

हिसार, 31 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा रोडवेज के

हिसार डिपो में कर्मचारियों ने शनिवार तड़के चार बजे से अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू

कर दिया। अलसुबह ही कर्मचारियों ने डिपो के मुख्य गेट पर मोर्चा संभाल लिया और बसों

का संचालन पूरी तरह ठप कर दिया। कर्मचारियों ने सुबह चंडीगढ़ जाने वाली बस को भी कार्यशाला

और बस अड्डे से बाहर नहीं निकलने दिया। चक्का जाम के चलते हिसार डिपो की दिल्ली, चंडीगढ़,

जयपुर, बीकानेर, अजमेर, आगरा और खाटूश्याम सहित लंबे मार्गों की बसों के अलावा आदमपुर,

उकलाना, भादरा और चौधरीवास जैसे स्थानीय मार्गों की बस सेवाएं भी बंद रहीं। हालांकि,

दूसरे रोडवेज डिपुओं की बसों का संचालन सुचारू रहने और निजी बसें अपने निर्धारित समय

पर चलती रहने से यात्रियों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

साझा संघर्ष समिति के नेतृत्व में शनिवार को हिसार

डिपो के सैकड़ों कर्मचारियों ने हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यशाला कर्मचारियों,

लिपिकों, सफाई कर्मचारियों, चालकों और परिचालकों ने एकजुट होकर चक्का जाम को सफल बनाया।

कर्मचारियों ने मुख्य गेट पर धरना देकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

हड़ताल को समर्थन देने के लिए राज्य साझा मोर्चा

के वरिष्ठ कर्मचारी नेता जयबीर घनघस, जगदीप लाठर, अनूप लाठर, देवेंद्र धनवशी और रामनिवास

सामदो पहुंचे। इनके अलावा रोहतक से चालक संघ के प्रधान ओम, जींद से घड़सी राम तथा सेवानिवृत्त

कर्मचारी सुभाष ढिल्लों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।

हिसार डिपो की बसों का संचालन पूरी तरह बंद रहने

के बावजूद दूसरे रोडवेज डिपुओं की बसें अपने निर्धारित मार्गों पर चलती रहीं। इसके

अलावा निजी बस संचालकों ने भी अपनी बसों का संचालन सामान्य रखा। सुबह बस अड्डे पहुंचे

यात्रियों को हिसार डिपो की बसें तो नहीं मिलीं, लेकिन दूसरे डिपुओं की बसों और निजी

बसों के माध्यम से उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के विकल्प मिलते रहे। इसके चलते चक्का

जाम का असर मुख्य रूप से हिसार डिपो की बस सेवाओं तक सीमित रहा और यात्रियों को व्यापक

परेशानी नहीं झेलनी पड़ी।

साझा संघर्ष समिति के प्रेस प्रवक्ता संदीप जैनावास

ने कहा कि कर्मचारियों के वर्षों से लंबित वित्तीय भत्तों का भुगतान नहीं होना उनके

साथ अन्याय है। कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई और जायज अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

इसके बावजूद बार-बार मांग उठाने पर भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा।

दिन में जीएम ने की बात, नहीं बनी सहमति

रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते महाप्रबंधक

राहुल मित्तल के बुलावे पर शनिवार को दिन में भी दोनों पक्षों में बातचीत हुई। इसमें

यातायात प्रबंधक प्रीतम कुमार एवं अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कर्मचारी

नेताओं को कार्रवाई का ब्यौरा दिया और बताया कि टीए व मेडिकल बिल के कुछ बिल पास हो

चुके हैं वहीं एलटीसी मंगलवार तक मिलने की संभावना है। इसी तरह अन्य वेतन, भत्तों पर

भी काम हो रहा है, इसलिए कर्मचारी आंदोलन का रास्ता छोड़कर बसों का संचालन शुरू करें। सांझा संघर्ष समिति ने

अधिकारियों के आश्वासन व बातचीत को ठुकरा दिया और कहा कि जब तक उनके सभी वेतन, भत्ते

नहीं मिलेंगे, वे काम पर नहीं लौटेंगे।

धरने के दौरान मुख्य रूप से साझा संघर्ष समिति

के नेता जोगेंद्र पंघाल, अजय दुहन, बजरंग लाखा, कर्मवीर मसूदपुर, जितेंद्र शर्मा, अमित

जुगलान, राजकुमार चौहान, पवन कनोह, दयानंद सरसाना, अरुण शर्मा, राजेश जांगड़ा और नरेंद्र

खरड़ सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर