हिसार : गुरु जम्भेश्वर विवि ने प्रस्तुत किया पांच वर्षीय रोडमैप

 


चरणबद्ध तरीके से आरंभ होंगे इंजीनियरिंग, चिकित्सा

एवं कौशल आधारित कोर्स

हिसार, 19 अप्रैल (हि.स.)। भारत को विकसित भारत

@ 2047 के रूप में स्थापित करने के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में यहां

के गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने आगामी पांच वर्षों का

एक दूरदर्शी शैक्षणिक रोडमैप प्रस्तुत किया है। इस रोडमैप के अंतर्गत विश्वविद्यालय

इंजीनियरिंग, चिकित्सा एवं कौशल आधारित क्षेत्रों में अत्याधुनिक और उद्योग-संरेखित

पाठ्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से प्रारंभ करेगा, ताकि देश की युवा शक्ति को एक सक्षम,

प्रशिक्षित और आत्मनिर्भर कार्यबल में परिवर्तित किया जा सके।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने रविवार काे बताया कि गुरु

जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, जो अपनी स्थापना से ही पर्यावरण संरक्षण, गुणवत्ता शिक्षा

और शोध उत्कृष्टता के लिए जाना जाता रहा है, अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना

के अनुरूप शिक्षा को ज्ञान से कौशल, कक्षा से उद्योग और डिग्री से दक्षता की ओर ले

जाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दृष्टि के तहत बीटेक के अंतर्गत वीएलएसआई डिजाइन, साइबर

सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स, क्लाउड कम्प्यूटिंग, ब्लॉक चेन

टेक्नोलोजी, इलैक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलोजी, रिन्यूऐबल एनर्जी और सेमीकन्डक्टर इंजीनियरिंग

जैसे उभरते क्षेत्रों में पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे।

इसी क्रम में स्वास्थ्य क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं

को ध्यान में रखते हुए एमबीबीएस, बीएएमएस, नर्सिंग, मेडिकल लैबोरेट्री टेक्नोलोजी,

कार्डियक केयर, डायलिसिस, इमरजेंसी एंड ट्रामा केयर, ओप्टोमेटरी, रेसपायरट्री थैरेपी

तथा न्यूट्रेशन एंड डायटिशियन जैसे कार्यक्रम भी आगामी वर्षों में चरणबद्ध रूप से शरू

किए जाएंगे। इसके साथ ही फार्मेसी, बी,वीओसी, तथा ईएसजी एंड सस्टेनेबिलिटी और हेल्थ

डाटा एनालिटिक्स जैसे सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कार्यक्रम युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल

प्रदान करेंगे।

विश्वविद्यालय का यह पांच वर्षीय विजन केवल पाठ्यक्रमों

के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक ऐसा शैक्षणिक इकोसिस्टम विकसित

करना है, जहां उद्योग, अनुसंधान और नवाचार का समन्वय हो। इस दिशा में इंडस्ट्री पार्टनरशिप,

इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को विशेष

प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य अनुभव और वैश्विक दृष्टिकोण

प्राप्त हो सके।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह पहल

युवा शक्ति को कौशल शक्ति में रूपांतरित करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास सिद्ध होगी।

आने वाले पांच वर्षों में इन पाठ्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन के साथ गुजविप्रौवि न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश में एक मॉडल स्किल-ओरिएंटेड

यूनिवर्सिटी के रूप में स्थापित होगा, जो भारत को एक वैश्विक ज्ञान और कौशल महाशक्ति

बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर