नूंह में निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों ने दिया धरना,समानांतर लाइसेंस रद्द करने की मांग

 


नूंह, 21 जुलाई (हि.स.)। नूंह व गुरुग्राम में बिजली वितरण के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को नूंह डिवीजन कार्यालय के सामने बिजली इंजीनियरों, कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा, मजदूर संगठनों और उपभोक्ताओं ने संयुक्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कर्मचारियाें ने समानांतर वितरण लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शन के बाद हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन के सचिव के नाम संबोधित ज्ञापन कार्यकारी अभियंता कुलदीप यादव को सौंपा गया। ज्ञापन में नूंह और गुरुग्राम में समानांतर वितरण लाइसेंस के लिए दायर आवेदन को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। साथ ही आयोग द्वारा गठित तथाकथित विशेषज्ञ समिति को भी भंग करने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि समिति का गठन मनमाने और असंवैधानिक तरीके से किया गया है तथा वह निष्पक्ष निर्णय लेने की विश्वसनीयता नहीं रखती।

गौरतलब है कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने नूंह और गुरुग्राम में बिजली वितरण का लाइसेंस देने के लिए हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन में आवेदन किया है। इसी के विरोध में बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, संयुक्त किसान मोर्चा और उपभोक्ता संगठनों द्वारा लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि यदि निजी कंपनियों को सार्वजनिक वितरण नेटवर्क का उपयोग करते हुए केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की अनुमति दी गई तो सरकारी बिजली वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे। इसका सीधा असर किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा तथा बिजली दरों का बोझ बढ़ सकता है।

वक्ताओं ने कहा कि बिजली एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है और इसे निजी कंपनियों के मुनाफे का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्युत अधिनियम सभी उपभोक्ताओं को समान और भेदभावरहित बिजली आपूर्ति की बात करता है, जबकि समानांतर वितरण व्यवस्था इस सिद्धांत के विपरीत है।

सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि निजी कंपनियों को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने से सार्वजनिक बिजली व्यवस्था कमजोर होगी, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होगी और अंततः बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

प्रदर्शन को ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, ईईएफआई के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रविन्द्र घणघस, ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशंस वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद गनी, एचएसईबी वर्कर यूनियन के मुख्य संगठनकर्ता विनोद शर्मा, डिप्टी जनरल सेक्रेटरी विजय हुड्डा, पावर कॉरपोरेशंस वर्कर यूनियन (एससी/एसटी) के राज्य प्रधान बिजेंद्र बराड़, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सुमित दलाल और जोगेन्द्र नैन सहित अनेक नेताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेश शर्मा और सुबोध जाखड़ ने की, जबकि संचालन जितेन्द्र तेवतिया ने किया।

प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक एवं तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र की सुरक्षा और सभी उपभोक्ताओं को सस्ती, विश्वसनीय तथा गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया