पीएम आवास योजना : 11 साल में स्वीकृत 28 लाख घर अब भी अधूरे

 

-अंबाला के सांसद ने लोकसभा में उठाया मुद्दा

चंडीगढ़, 13 मार्च (हि.स.)। प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी गति के कारण यह योजना कटघरे में आ गई है। लोकसभा में अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि देशभर में स्वीकृत लाखों घर आज भी अधूरे हैं, जबकि 2022 तक हर परिवार को पक्का घर देने का लक्ष्य तय किया गया था।

सांसद वरुण चौधरी ने संसद में पूछा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) और पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत बजट अनुमान और वास्तविक खर्च का ब्यौरा क्या है। साथ ही हरियाणा में इस योजना के तहत चिन्हित किए गए पात्र परिवारों की संख्या, अब तक पूरे हुए आवासों की संख्या और अंतिम सर्वेक्षण की तिथि क्या है।

आंकड़ों के अनुसार, 25 जून, 2015 से लागू प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत अब तक देशभर में करीब 125.15 लाख घर स्वीकृत किए गए। इनमें से 97.30 लाख आवास ही पूरे होकर लाभार्थियों को मिल पाए, जबकि लगभग 28 लाख घर अभी भी निर्माणाधीन या अधूरे पड़े हैं। इससे योजना की जमीनी प्रगति और तय लक्ष्य की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।

योजना के वित्तीय पहलू को देखें तो बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच भी बड़ा अंतर सामने आया है। वर्ष 2024-25 के लिए 30,171 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया, लेकिन वास्तविक खर्च केवल 6,595 करोड़ रुपये ही हो पाया। इसी तरह 2025-26 में 6,773 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया।

हरियाणा में भी योजना की गति अपेक्षाकृत धीमी दिखाई देती है। करीब 3 करोड़ आबादी वाले राज्य में पिछले 11 वर्षों में 1,32,989 आवास स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 59,669 आवास आज तक बनकर तैयार नहीं हो पाए हैं। इस हिसाब से औसतन हर साल केवल करीब 6,600 परिवारों को ही घर मिल पाया है। वरुण चौधरी का कहना है कि राज्य की जरूरतों के हिसाब से यह संख्या काफी कम है और योजना को तेज गति से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा