गेस्ट टीचर मामले में हरियाणा सरकार की एलपीए का निस्तारण, नियमितीकरण की उम्मीद जगी
चंडीगढ़, 06 अगस्त (हि.स.)। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य के करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों से जुड़े मामले में सरकार की तरफ से दाखिल लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) का निपटारा कर दिया है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद गेस्ट टीचर्स में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द ही उन्हें नियमित करेगी। नियमित होने के बाद इन शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों की तरह कई सुविधाएं मिलेंगी।
गेस्ट टीचर एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने कहा कि गेस्ट टीचर पिछले 20 साल से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने 2014 में इन शिक्षकों को नियमित करने का वादा किया था। याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह ने बताया कि साल 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों पर भर्ती निकली थी। इसके लिए नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन, चयन समिति का गठन भी किया गया था। आवेदकों की जांच और मेरिट लिस्ट जारी करने के बाद ही नियुक्ति कराई गई थी।
सुखविंदर सिंह ने बताया कि ये नियुक्ति गेस्ट फैकल्टी के रूप में हुई। 12 हजार 700 शिक्षखों को इसमें नियुक्ति दी गई। नियुक्ति के बाद से ही शिक्षक और याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे थे, जिसके बाद मामला उच्च न्यायालय में चला गया।
हरियाणा सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी। वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे स्थायी करने के पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने मामले में कहा कि सरकार खुद मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन्हें नियुक्त किया गया था। करीब 20 साल तक उनकी सेवाएं ली गई। इतने लंबे समय तक सेवाएं लेना उन्हें केवल ‘स्टॉप गैप अरेंजमेंट’ बताना पूरी तरह अनुचित है। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं। 20 वर्षों तक संविदा पर काम लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा