तय समय में केस निपटारे के निर्देश देना न उचित और न जरूरी : हाई कोर्ट

 

चंडीगढ़, 21 जुलाई (हि.स.)। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुग्राम के एक केस में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि तय समय-सीमा में निपटारे के लिए निर्देश जारी करना न तो उचित है और न ही जरूरी है क्योंकि देश भर की अदालतों पर बड़ी संख्या में मामलों का बोझ है। कोर्ट ने कहा कि हर अदालत का यह कर्तव्य है कि वह जरूरी मामलों को जल्द से जल्द निपटाए।

ये टिप्पणियां तब आईं जब जस्टिस विक्रम अग्रवाल ने एक ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह किसी मामले की सुनवाई को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए ठोस प्रयास करे। उच्च न्यायालय की बेंच गुरुग्राम सदर पुलिस स्टेशन में 21 अप्रैल, 2017 को धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(बी) और आईपीसी की धारा 420 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि एफआईआर 2017 में दर्ज की गई थी और अंतिम रिपोर्ट 2020 में दाखिल की गई थी। वकील ने कहा कि मामले की सुनवाई कई बार टाली गई, इसलिए सुनवाई को तय समय-सीमा में पूरा करने के लिए निर्देश की आवश्यकता थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा