यमुनानगर: निजी स्कूलों में किताबों की अनिवार्य खरीद के विरोध में अभिभावकों ने किया प्रदर्शन
यमुनानगर, 13 अप्रैल (हि.स.)। यमुनानगर में निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से किताबें खरीदने के कथित दबाव को लेकर अभिभावकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे पर अभिभावकों ने सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने शिक्षा विभाग को एक शिकायत पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालयों में नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक हर वर्ष नई किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को एक तय दुकान से ही पुस्तकें लेने के लिए कहता है, जिससे उन्हें अन्य विकल्प नहीं मिल पाता।
अभिभावक अंकुश बक्शी ने बताया कि निर्धारित दुकानों के अलावा वही किताबें कहीं और उपलब्ध नहीं कराई जातीं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों को अधिकतम खुदरा मूल्य पर बेचा जाता है और किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाती। उदाहरण के तौर पर कक्षा आठ के एक छात्र की किताबों पर लगभग 8600 रुपये तक खर्च कराया जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि हर वर्ष पुस्तकों में मामूली बदलाव कर दिए जाते हैं, जबकि पाठ्यक्रम में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता।
इससे पुराने सेट का उपयोग संभव नहीं रह जाता और हर साल नई खरीद करनी पड़ती है। प्रदर्शनकारी संजीव ने इसे एक प्रकार का एकाधिकार बताते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन और संबंधित विक्रेताओं के बीच मिलीभगत से यह व्यवस्था चल रही है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को पहले भी प्रशासन के संज्ञान में लाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभिभावकों ने मांग की है कि एक ही दुकान से किताबें खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए, खुले बाजार से खरीद की अनुमति दी जाए और अनावश्यक बदलावों पर रोक लगाई जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार