कैथल: धान खरीद में सुस्ती से मंडियों में बढ़ा दबाव, खुले में पड़ा लाखों टन धान: सुरजेवाला
कैथल, 07 अक्टूबर (हि.स.)। धान खरीद सीजन शुरू होने के साथ ही मंडियों में किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। खरीद की धीमी रफ्तार और उठान नहीं होने से बड़ी मात्रा में धान मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा है। इसी स्थिति का जायजा लेने बुधवार को कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला कैथल की नई अनाज मंडी पहुंचे। उन्होंने मंडी के पूर्व प्रधान सतीश जैन की दुकान पर प्रेसवार्ता करने के बाद मंडी का दौरा किया और किसानों व आढ़तियों से बातचीत कर खरीद व्यवस्था की स्थिति जानी।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार के दावों के विपरीत मंडियों में धान की खरीद और उठान बेहद धीमा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक करीब सात लाख सात हजार टन धान मंडियों में पहुंच चुका है, लेकिन खरीद केवल एक लाख 38 हजार टन की हुई है और उठान महज 21 हजार टन हुआ है। ऐसे में करीब छह लाख 86 हजार टन धान खुले में पड़ा है। उन्होंने चिंता जताई कि आगामी दिनों में बारिश की संभावना के बीच यदि समय रहते उठान नहीं हुआ तो किसानों की फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया की धीमी गति का असर सीधे किसान पर पड़ रहा है। अब तक 16,302 किसानों की फसल बिक पाई है, जबकि भुगतान केवल करीब 700 किसानों को हुआ है। उन्होंने सरकार से खरीद के साथ-साथ भुगतान प्रक्रिया में भी तेजी लाने की मांग की। सुरजेवाला ने कैथल की स्थिति को लेकर कहा कि जिले में अब तक करीब एक लाख सात हजार टन धान मंडियों में पहुंच चुका है, लेकिन खरीद सिर्फ 8,600 टन के आसपास हुई है। उठान की स्थिति और चिंताजनक है, जो करीब 195 टन ही बताया गया है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर मंडियों में आने वाले किसानों पर पड़ रहा है और जगह की कमी के कारण आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने सरकार पर फसल खरीद को लेकर कई तरह की पाबंदियां लगाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार प्रति एकड़ खरीद की सीमा तय करने से किसान की पूरी उपज एमएसपी पर बिकने को लेकर असमंजस पैदा हो गया है। उन्होंने दावा किया कि कैथल में 27.39 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा से किसानों की अतिरिक्त उपज एमएसपी खरीद से बाहर हो सकती है।
कांग्रेस विधायक ने धान में 17 प्रतिशत नमी की निर्धारित सीमा को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि खरीद एजेंसियां नमी को आधार बनाकर किसानों की फसल रोकती हैं या कीमत में कटौती करती हैं तो इसका सीधा नुकसान किसान को उठाना पड़ता है। उन्होंने मंडियों में पर्याप्त ड्रायर और फसल सुखाने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की।
सुरजेवाला ने कंबाइन से धान कटाई के समय पर लगाई गई पाबंदियों को भी किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि कटाई का समय सीमित होने से किसानों को फसल तैयार करने में दिक्कत हो रही है। उनके मुताबिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने और राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री जैसे प्रावधानों से किसान पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों को फरमान देने के बजाय मंडियों में उनकी फसल खरीदने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश का किसान मंडियों में अपनी फसल लेकर खड़ा है, जबकि सरकारी दावे जमीनी स्थिति से मेल नहीं खा रहे।
इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामचन्द्र गुर्जर ढांड, राजीव गांधी पंचायती राज जिलाध्यक्ष कर्मबीर शर्मा खुराना, अश्विनी शोरेवाला, कांग्रेस शहरी ब्लॉक अध्यक्ष रामनिवास मित्तल, पूर्व प्रधान सतीश जैन सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे