हिसार : मानसिक रूप से स्वस्थ रहना सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी जरूरी : प्रो. संदीप राणा
गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता पर एक दिवसीय
कार्यशाला आयोजित
हिसार, 08 अक्टूबर (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
के सेंटर फॉर काउंसलिंग एंड वेल-बींग द्वारा मनोविज्ञान विभाग के सहयोग से मनोवैज्ञानिक
प्राथमिक सहायता (साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया
गया। चौधरी रणबीर सिंह सभागार के सेमिनार हॉल-1 में गुरुवार काे आयोजित इस कार्यशाला में मनोविज्ञान
विभाग के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप
में श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राइसेंटेनरी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक
डॉ. विकास शर्मा उपस्थित रहे जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर काउंसलिंग
एंड वेल-बींग के निदेशक प्रो. संदीप राणा ने की। उप निदेशक प्रो. राकेश बहमनी, मनोविज्ञान
विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय परमार, प्रो. मंजू, डा. तरूणा, डा. गुंजन, डा. गोबिंद यादव
व डा. गौरव भी उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता डॉ. विकास शर्मा ने तनाव, भावनाओं, सहानुभूति और परामर्श की प्रक्रिया
के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तनाव हमेशा नकारात्मक
नहीं होता, बल्कि सकारात्मक परिस्थितियों में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने
सुपर कंप्यूटर के उदाहरण के माध्यम से समझाया कि जिस प्रकार सुपर कंप्यूटर के बेहतर
संचालन के लिए अनुकूल वातावरण आवश्यक है, उसी प्रकार मानव मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक
दृष्टिकोण और अनुकूल मानसिक वातावरण जरूरी है।
डाॅ. विकास शर्मा ने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता में सहानुभूति रखने, व्यक्ति
की भावनाओं को समझने और उन्हें स्वीकार करने के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, विद्यार्थियों
को बताया कि परामर्श के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन व्यवहारों से बचना
चाहिए। उन्होंने मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता की आवश्यकता, इसके उद्देश्य तथा इसे
प्रभावी ढंग से प्रदान करने के तरीकों के बारे में भी विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम में प्रो. संदीप राणा ने अपने स्वागत संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य
के महत्व पर प्रकाश डाला।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर