नूंह के गांव जैताका में अंतिम यात्रा नहीं आसान, न पक्का रास्ता न टिन शैड
नूंह, 05 सितंबर (हि.स.)। नूंह जिले के नगीना खंड के गांव जैताका में श्मशान भूमि तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को गांव के बुजुर्ग नंदकिशोर की अंतिम यात्रा के दौरान भारी बरसात के बीच परिजनों और ग्रामीणों को खेतों से होकर श्मशान भूमि तक पहुंचना पड़ा। इस दौरान कीचड़ और जलभराव के कारण लोगों को काफी दिक्कत हुई।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव की श्मशान भूमि में भी अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। शनिवार को नंदकिशोर के अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को टीनों का सहारा लेकर दाह संस्कार करना पड़ा। श्मशान घाट में बैठने के लिए टिन शेड सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण लोगों में जिला प्रशासन के प्रति रोष है।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने जिला प्रशासन से श्मशान भूमि तक पक्का रास्ता बनवाने तथा श्मशान घाट में लोगों के बैठने के लिए टिन शेड का निर्माण कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में रास्ते की स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे अंतिम यात्रा के दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य लोगों को विशेष परेशानी होती है।
पूर्व सरपंच लेखराज ने भी जिला प्रशासन से जैताका गांव की श्मशान भूमि तक रास्ता बनवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक व्यवस्था के लिए भी ग्रामीणों को खेतों के रास्ते जाने के लिए मजबूर होना गंभीर समस्या है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया