नारनौल में टीबी के खिलाफ निर्णायक जंग, 106 ग्राम पंचायतें हुईं टीबी मुक्त घोषित

 


विश्व क्षय रोग दिवस पर सम्मान समारोह, गोल्ड-सिल्वर-ब्रोंज श्रेणी में पंचायतों को किया सम्मानित

नारनाैल, 24 मार्च (हि.स.)। जिले में टीबी (क्षय रोग) जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ प्रशासन और ग्राम पंचायतों की संयुक्त पहल से उल्लेखनीय सफलता मिल रही है। जिले की 106 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है।

यह जानकारी उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने मंगलवार को विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए दी। उपायुक्त ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल टीबी मरीजों को मुफ्त जांच और उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि ‘निक्षय पोषण योजना’ के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता देकर मुख्यधारा से जोड़ना भी है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों के समन्वय को इस अभियान की सबसे मजबूत कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह उन पंचायतों के समर्पण और प्रयासों का प्रतीक है, जिन्होंने सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कर खुद को टीबी मुक्त बनाने में सफलता हासिल की। उपायुक्त ने बताया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।

इस अवसर पर उपायुक्त ने 106 ग्राम पंचायतों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी। इनमें चार पंचायतों को गोल्ड मेडल, 50 को सिल्वर और 52 पंचायतों को ब्रोंज मेडल श्रेणी में शामिल किया गया है। गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली पंचायतों में खंड नारनौल की कुक्सी, कनीना की कपूरी व मानपुरा तथा सीहमा खंड की भालखी शामिल हैं।

उपायुक्त ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक दुनिया को टीबी मुक्त बनाना है, जिसमें भारत भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। उन्होंने सरपंचों से आह्वान किया कि वे अपने आसपास के गांवों को भी जागरूक करें और इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दें। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक टीमों ने रागनियों के माध्यम से लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अशोक कुमार, डीडीपीओ प्रमोद कुमार, डॉ नवीन यादव सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला