नारनौलः बच्चे समाज के सबसे कोमल और संवेदनशील सदस्यः डॉ मंगल सेन
पोक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम व साइबर क्राइम पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित
नारनाैल, 24 फ़रवरी (हि.स.)। बच्चे समाज के सबसे कोमल और संवेदनशील सदस्य होते हैं। उन्हें सुरक्षित वातावरण देना हमारा नैतिक कर्तव्य है। किशोर न्याय अधिनियम का उद्देश्य बच्चों का सुधार और पुनर्वास करना है।
यह बात नगराधीश डॉ मंगल सेन ने मंगलवार को पंचायत भवन में पोक्सो एक्ट किशोर न्याय अधिनियम व साइबर क्राइम पर आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन से संबंधित पोस्टर भी जारी किया। नगराधीश डॉ मंगल सेन ने कहा कि जिसने 18 वर्ष पूरे नहीं किए हैं वह बच्चा है। बच्चों से संबंधित किसी भी घटना की रिपोर्ट करने के लिए टोल फ्री नंबर 1098 या 112 पर कॉल कर सकते हैं। उन्होंने साइबर क्राइम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों के साथ होने वाले साइबर अपराधों के प्रति जागरूक होना जरूरी है। सहायक जिला न्यायवादी नवीन श्योरान ने पोक्सो एक्ट, साइबर क्राइम थाना से एसआई इंद्रजीत ने साइबर क्राइम व सामाजिक कार्यकर्ता कमल ने किशोर न्याय अधिनियम के बारे में जागरूक किया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी संदीप ने बताया कि किसी पीड़ित बालक या देखभाल व आवश्यकता वाले बालक का अखबार समाचार चैनल पर पहचान उजगार नहीं की जा सकती है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को छह माह की सजा लाख जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी विशेश्वर कौशिक, सहायक जिला न्यायवादी रफीक, संरक्षण अधिकारी एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा, एलपीओ राजकुमार कोठारी, बाल संरक्षण अधिकारी संतोष कुमारी, बाल संरक्षण अधिकारी सुषमा, लेखाकार प्रेमलता के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला