नारनाैल: एआई वॉयस क्लोनिंग से ठगी का खतरा, सिर्फ आवाज सुनकर न करें भरोसा: एसपी दीपक
नारनाैल, 06 सितंबर (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपना लिया है। अब एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग के जरिए किसी व्यक्ति की हूबहू आवाज तैयार कर उसके परिजनों और परिचितों से पैसे या गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। रविवार को पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने लोगों से ऐसे मामलों में सतर्क रहने की अपील की।
एसपी ने बताया कि साइबर ठग सोशल मीडिया, यूट्यूब, व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ सेकेंड की ऑडियो क्लिप से किसी व्यक्ति की नकली आवाज तैयार कर लेते हैं। इसके बाद उसी आवाज में परिवार या रिश्तेदारों को फोन कर आपात स्थिति का हवाला देते हुए तुरंत पैसे भेजने या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने को कहते हैं। आवाज वास्तविक लगने के कारण लोग कई बार बिना पुष्टि किए भरोसा कर लेते हैं।
ठग बातचीत के दौरान परिवार, कारोबार और बैंकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी जुटा सकते हैं। बाद में इसी जानकारी का इस्तेमाल बड़े साइबर फ्रॉड में किया जा सकता है। एआई और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण केवल आवाज या वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना सुरक्षित नहीं है।
एसपी दीपक कुमार ने कहा कि किसी परिचित की आवाज में पैसे या गोपनीय जानकारी मांगी जाए तो घबराएं नहीं। पुराने मोबाइल नंबर पर स्वयं कॉल कर पुष्टि करें। परिवार में एक सीक्रेट कोड वर्ड भी तय किया जा सकता है। ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
संदिग्ध कॉल या ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। समय पर सूचना देने से ठगी की राशि बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला