नारनौल में घोड़ी पर बैठकर निकली बेटी मेघा, बराबरी का दिया संदेश

 


माता-पिता ने तोड़ी परंपरागत सोच, बेटियों को भी समान अधिकार देने की पहल बनी चर्चा का केंद्र

नारनाैल, 19 अप्रैल (हि.स.)। नारनौल के हुड्डा सेक्टर एक में शनिवार रात एक प्रेरणादायक और अनोखी पहल देखने को मिली, जब एक परिवार ने अपनी बेटी की शादी से पहले उसे घोड़ी पर बैठाकर बनवारा निकाला। इस पहल ने समाज में व्याप्त बेटा-बेटी के भेदभाव पर मजबूत संदेश दिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

रविंद्र सिंह यादव और उनकी पत्नी नीतू यादव ने अपनी बेटी मेघा, जो एमएससी पास है, का बनवारा पूरे धूमधाम और सम्मान के साथ निकाला। आमतौर पर यह परंपरा बेटों के लिए निभाई जाती है, लेकिन इस परिवार ने समाज में नई सोच का परिचय देते हुए इस परंपरा को बदलने का साहस दिखाया। रविंद्र सिंह यादव, जो नारनौल थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, ने बताया कि उनके लिए बेटा और बेटी दोनों समान हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को भी वही सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए, जो बेटों को दिए जाते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी बेटी के बनवारे को भी उसी गरिमा के साथ आयोजित किया।

माता नीतू यादव, जो एक सरकारी अध्यापिका हैं, ने भी इस पहल को समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और परिवार की इस सोच की खुलकर सराहना की। कार्यक्रम में मौजूद डॉ वीरेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि ऐसे माता-पिता ही समाज का वास्तविक उत्थान कर सकते हैं, जिनकी सोच प्रगतिशील और संस्कार मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं और इस तरह की पहल समाज को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला